इंपोर्ट ड्यूटी का बड़ा झटका
भारत सरकार ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को 15% तक बढ़ा दिया है, जिसका सीधा असर बाज़ार पर दिख रहा है. इस बड़े फैसले के बाद सोने की फिजिकल डिमांड में भारी कमी आई है. जहाँ एक ओर वॉल्यूम में 70% की भारी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं दूसरी ओर बाज़ार में सोने की कीमतें तेज़ी से नीचे आ रही हैं. सरकार की इस कोशिश से जहाँ स्पेकुलेटिव इंपोर्ट पर लगाम लगी है, वहीं छोटे और बड़े ज्वेलर्स के बिज़नेस पर भी बुरा असर पड़ा है.
बाज़ार में लिक्विडिटी का खेल
अब लोग सोना खरीद तो नहीं रहे, बल्कि अपने पुराने सोने को बेचकर ज़रूरतें पूरी कर रहे हैं. पहले जहाँ लोग सोने को लंबे समय के लिए सेविंग के तौर पर रखते थे, वहीं अब फ्यूल और खाने-पीने जैसी ज़रूरी चीज़ों के बढ़ते दामों के कारण लोग अपने सोने को इमरजेंसी फंड की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे मार्केट में पुराने सोने की सप्लाई बढ़ गई है, जिससे ज्वेलर्स के मार्जिन पर दबाव बना हुआ है, भले ही ग्लोबल गोल्ड प्राइस स्थिर रहे.
छोटे ज्वेलर्स पर संकट
छोटे ज्वेलर्स के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, क्योंकि उनके पास बड़े ब्रांड्स की तरह बड़ा बैलेंस शीट नहीं है. ऐसे में, अब वे नए गहने बेचने की जगह पुराने सोने के बिज़नेस पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं. इंपोर्ट ड्यूटी के इसी स्तर के बने रहने पर छोटे ज्वेलर्स के लिए कैपिटल कॉस्ट निकालना मुश्किल हो सकता है. इससे वे या तो बिज़नेस बंद करने पर मजबूर हो सकते हैं या बड़े रिटेल चेन्स के साथ जुड़ सकते हैं.
आगे क्या?
आने वाले समय में बाज़ार में और भी सुस्ती रहने की उम्मीद है, खासकर 'अधिक मास' के दौरान. जानकारों का मानना है कि जब यह शुभ समय बीतेगा, तब भी इंपोर्ट ड्यूटी के ज़्यादा होने के कारण लोग कम कैरेट वाले या हल्के डिज़ाइन के गहने खरीदना पसंद करेंगे. यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इंपोर्ट ड्यूटी को बनाए रखती है या बाज़ार को बचाने के लिए इसमें ढील देती है.
