सोने की खरीद पर PM मोदी की अपील को इंडस्ट्री का झटका! 3.5 करोड़ नौकरियां खतरे में

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
सोने की खरीद पर PM मोदी की अपील को इंडस्ट्री का झटका! 3.5 करोड़ नौकरियां खतरे में
Overview

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोने की खरीद को टालने की अपील पर भारत के सोने के उद्योग ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ऑल इंडिया जूलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन (AIJGF) ने कहा है कि इस फैसले से **3.5 करोड़** लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी। फेडरेशन ने मांग को दबाने के बजाय, विदेशी मुद्रा (Forex) को लेकर चिंताएं दूर करने के लिए भारत के घरेलू सोने के भंडार को जुटाने और रीसायकल करने के लिए एक संरचनात्मक सुधार का प्रस्ताव दिया है।

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क्यों कर रहा है इंडस्ट्री विरोध?

इंडस्ट्री का कहना है कि भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े निजी सोने के भंडार हैं, जिन्हें विदेशी मुद्रा (Forex) प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। AIJGF के मुताबिक, सोने की मांग को दबाने से कारीगरों से लेकर छोटे ज्वैलर्स तक, पूरे जूलरी इकोसिस्टम को भारी नुकसान हो सकता है, जिनकी आय सीधे बिक्री पर निर्भर करती है। यह विदेशी मुद्रा के प्रबंधन पर सरकार और उद्योग के बीच एक बड़े मतभेद को दर्शाता है - क्या मांग को कम करके या मौजूदा घरेलू सोने की संपत्ति का उपयोग करके ऐसा किया जाना चाहिए?

विदेशी मुद्रा की चिंताएं और PM की अपील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया अपील, जो ग्लोबल सप्लाई चेन की दिक्कतों और पश्चिम एशिया में युद्ध को देखते हुए की गई थी, पर AIJGF ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। फेडरेशन का तर्क है कि विदेशी मुद्रा बचाने के मकसद से उठाए गए ये कदम, इस सेक्टर में काम करने वाले लगभग 3.5 करोड़ लोगों की नौकरियों के लिए खतरा पैदा कर रहे हैं। यह भी ध्यान देने योग्य है कि 1 मई, 2026 तक भारत के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) घटकर $690.69 बिलियन रह गए थे, जिसमें सोने की होल्डिंग का भी योगदान था। 11 मई, 2026 को सोने की कीमतें $4,731.06 प्रति औंस के स्तर पर बनी हुई थीं।

इंडस्ट्री का समाधान: घरेलू सुधार

AIJGF का मुख्य समाधान घरेलू सोने के स्टॉक को सक्रिय रूप से जुटाने और रीसायकल करने पर केंद्रित है। इसके लिए, वे एक विशेष Bullion Bank स्थापित करने का प्रस्ताव दे रहे हैं, जिसे गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) या इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) जैसे इकोसिस्टम में बनाया जा सकता है। IIBX को 2022 में लॉन्च किया गया था ताकि बुलियन ट्रेडिंग को औपचारिक रूप दिया जा सके और आयात को सुव्यवस्थित किया जा सके। फेडरेशन ने यह भी सुझाव दिया है कि गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETFs) अपनी कुछ होल्डिंग को उधार दे सकते हैं और मौजूदा Gold Monetization Scheme (GMS) को भी बेहतर बनाया जाए। हालांकि, GMS को पिछले कुछ सालों में खराब प्रदर्शन के कारण मार्च 2025 में बंद कर दिया गया था। ऐतिहासिक रूप से, सोने की मांग को कम करने के सरकारी प्रयासों का नतीजा अक्सर तस्करी या रीसाइक्लिंग में वृद्धि के रूप में निकला है, न कि कुल खपत में कमी के तौर पर। भारत का वार्षिक गोल्ड आयात $71.98 बिलियन (फाइनेंशियल ईयर 2025-26) तक पहुंच गया था, जो देश की आयात पर निर्भरता को दर्शाता है। पश्चिम एशिया जैसे भू-राजनीतिक तनावों ने सोने को एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में बढ़ावा दिया है, हालांकि हालिया प्रदर्शन मौद्रिक नीति और ब्याज दरों के प्रति अधिक संवेदनशील लगता है।

आजीविका का जोखिम और असफल योजनाएं

सरकार विदेशी मुद्रा बचाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है, लेकिन AIJGF की दलील है कि मांग को दबाने की नीतियां हमेशा असफल साबित हुई हैं। अतीत में, सोने के आयात को सीमित करने के सरकारी प्रयासों ने देश के चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) को कम करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन इससे मांग अनौपचारिक चैनलों या तस्करी की ओर मुड़ गई। GMS के घटकों की सीमित सफलता और बंद होना, सरकार की निष्क्रिय घरेलू सोने को प्रभावी ढंग से जुटाने की क्षमता में कमजोरियों को उजागर करता है। इंडस्ट्री फेडरेशन को चिंता है कि कृत्रिम रूप से मांग को कम करने से लाखों कारीगरों और छोटे ज्वैलर्स को नुकसान पहुंच सकता है। भारत में सोने के सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए, इसे बचत और मुद्रा अवमूल्यन के खिलाफ एक बचाव (Hedge) के रूप में देखा जाता है, इसलिए मांग में पूरी तरह से कमी की संभावना कम है। IIBX और GIFT City जैसे वित्तीय केंद्र व्यापार के लिए नए रास्ते पेश कर सकते हैं, लेकिन इनका घरेलू सांस्कृतिक मांग पर कितना असर होगा, यह देखना बाकी है।

आगे का रास्ता: सुधार या अल्पकालिक समाधान?

AIJGF द्वारा एक समर्पित Bullion Bank और सोने के जुटाव के लिए एक नए दृष्टिकोण का आह्वान, दीर्घकालिक आर्थिक एकीकरण और स्थिरता की दिशा में एक विजन प्रस्तुत करता है। यह दृष्टिकोण भारत के विशाल निजी सोने के भंडारों को उत्पादक संपत्तियों में बदलने का लक्ष्य रखता है, जिससे नौकरियों का बलिदान किए बिना आयात पर निर्भरता कम हो सके। हालांकि गोल्ड ETFs का कारोबार ₹1,00,000 करोड़ से अधिक हो गया है, जो वित्तीय सोने में निवेशक की रुचि को दर्शाता है, फिर भी बड़े पैमाने पर घरों में रखे भौतिक सोने को जुटाना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। AIJGF के प्रस्तावों की सफलता पिछले मुद्रीकरण योजनाओं (monetization schemes) की बाधाओं को दूर करने और भारतीय परिवारों के लिए बचत के प्राथमिक साधन के रूप में सोने की गहरी सांस्कृतिक भूमिका को संबोधित करने पर निर्भर करेगी। यह बहस राष्ट्रीय आर्थिक नीति, वैश्विक भू-राजनीति और भारत की अर्थव्यवस्था व समाज में सोने के स्थायी महत्व के बीच जटिल परस्पर क्रिया को उजागर करती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.