क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
यह गिरावट अप्रैल 2025 में इंपोर्ट किए गए 35 टन सोने की तुलना में काफी बड़ी है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के दौरान हर महीने औसतन करीब 60 टन सोने का आयात होता रहा है। कस्टम अथॉरिटीज बैंकों से 3% के इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) की मांग कर रही हैं, जिसे 2017 में सिस्टम लागू होने के बाद से कभी लागू नहीं किया गया था।
इंपोर्ट क्यों रुके?
इस अचानक आए टैक्स के झटके और ऑफिशियल इंपोर्ट ऑथराइजेशन (Official Import Authorization) में हो रही देरी के चलते, भारत का 90% से ज्यादा गोल्ड इंपोर्ट संभालने वाले बैंकों ने शिपमेंट रोक दी है। इस वक्त करीब 8 टन सोना कस्टम क्लीयरेंस (Customs Clearance) का इंतजार कर रहा है।
त्योहारी मांग पर असर
यह स्थिति ऐसे समय पर आई है जब अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) जैसे सोने की खरीद वाले बड़े फेस्टिवल्स (Festivals) का मौसम है। ज्वैलर्स (Jewellers) और डीलर्स (Dealers) ने त्योहारी मांग को पूरा करने के लिए सोना इंपोर्ट किया था, लेकिन अब यह स्टॉक वेयरहाउस (Warehouse) में ही पड़ा है। इस सप्लाई की कमी की वजह से डोमेस्टिक गोल्ड प्रीमियम (Domestic Gold Premiums) बढ़कर $15 प्रति औंस तक पहुंच गया है।
सरकार का लक्ष्य और रुपये पर दबाव
सरकार की मंशा साफ है – देश के ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को कम करना और भारतीय रुपये (Indian Rupee) को मजबूती देना, जिस पर हाल के दिनों में काफी दबाव देखा गया है। भारत का ट्रेड डेफिसिट, जिसमें सोने और तेल के आयात का बड़ा हिस्सा है, एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इसी वजह से 30 अप्रैल, 2026 को रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर चला गया था।
ग्लोबल और लोकल रिस्क
भारत की यह इंपोर्ट में आई कमी वैश्विक सोने की कीमतों (Global Gold Prices) को भी नीचे ला सकती है, क्योंकि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गोल्ड कंज्यूमर (Gold Consumer) है। गोल्ड डोर (Gold Dore), यानी रिफाइनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले सेमी-प्योर अलॉय (Semi-pure Alloy) के इंपोर्ट में भी लाइसेंस एप्लीकेशन (License Application) के रिजेक्ट (Reject) होने या टाल दिए जाने की खबरें हैं। वहीं, 1 अप्रैल, 2026 से 17 बैंकों को बुलियन (Bullion) इंपोर्ट के लिए ऑथराइज (Authorize) किया गया था, लेकिन इसकी ऑफिशियल नोटिफिकेशन (Official Notification) 17 अप्रैल की देर शाम आई।
आगे क्या?
सरकार के ये कदम अल्पावधि में डोमेस्टिक मार्केट (Domestic Market) के लिए जोखिम पैदा कर रहे हैं, जिनमें कीमतों में उतार-चढ़ाव और अनऑफिशियल ट्रेड (Unofficial Trade) का बढ़ना शामिल है। यह स्थिति कब सुधरेगी, यह IGST विवाद और एडमिनिस्ट्रेटिव हर्डल्स (Administrative Hurdles) के क्लियर (Clear) होने पर निर्भर करेगा। यदि इंपोर्ट में यह धीमी रफ्तार जारी रही, तो रुपये और भारत के ट्रेड बैलेंस पर और दबाव आ सकता है।
