अगस्त 2026 में भारत का गोल्ड इंपोर्ट **57.75%** गिरकर **$2.3 बिलियन** पर आ गया है। सरकार द्वारा इम्पोर्ट ड्यूटी **15%** तक बढ़ाने के बाद यह बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिससे ज्वेलरी सेक्टर में मार्जिन और ग्रे मार्केट को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
भारत सरकार द्वारा मई 2026 में कीमती धातुओं पर इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15% करने का असर अब साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, गोल्ड का आयात पिछले साल के मुकाबले 57.75% गिरकर $2.3 बिलियन के स्तर पर सिमट गया है। इस कड़े कदम का मुख्य मकसद विदेशी मुद्रा की निकासी को रोकना और देश के ट्रेड डेफिसिट को संतुलित करना है।
चांदी की ओर बढ़ा रुझान
जहाँ सोने पर भारी टैक्स के कारण मांग कम हुई है, वहीं बाजार का रुख चांदी (Silver) की तरफ मुड़ गया है। अगस्त 2026 में चांदी का इंपोर्ट 127% बढ़कर $1.02 बिलियन पहुंच गया है। यह रुझान बता रहा है कि निवेशक और बिजनेस अब चांदी को एक बेहतर विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए चुनौतियां
ज्वेलरी और बुलियन कंपनियों के लिए यह 15% की ड्यूटी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरी है। इनपुट कॉस्ट बढ़ने से कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव है। इसके अलावा, टैक्स बढ़ने से 'ग्रे मार्केट' (अनऑफिशियल ट्रेड) के पनपने का खतरा भी बढ़ गया है, जो टैक्स भरने वाली लीगल कंपनियों के लिए अनफेयर कॉम्पिटिशन पैदा कर सकता है।
मैक्रो इकोनॉमिक असर
गोल्ड इंपोर्ट में कमी के चलते अगस्त में देश का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट $26.86 बिलियन रहा। हालांकि, मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट में 26.12% की बढ़ोतरी ने स्थिति को सहारा दिया है। भविष्य में ग्लोबल कमोडिटी की कीमतें और जियो-पॉलिटिकल तनाव करंट अकाउंट डेफिसिट पर क्या असर डालेंगे, इस पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। फिलहाल, सरकार का यह कदम आयात घटाने में तो सफल रहा है, लेकिन इसका लंबा असर इस बात पर निर्भर करेगा कि बाजार बढ़ती लागतों के साथ कैसे तालमेल बिठाता है।
