Gold Imports: इंपोर्ट टैक्स में 15% की बढ़ोतरी से सोना आयात में 27% की बड़ी गिरावट

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Gold Imports: इंपोर्ट टैक्स में 15% की बढ़ोतरी से सोना आयात में 27% की बड़ी गिरावट

भारत में गोल्ड इंपोर्ट (Gold Import) में भारी कमी देखी गई है। फाइनेंशियल ईयर 2026 की पहली छमाही में यह **27%** गिरकर **USD 19.27 बिलियन** पर आ गया है। सरकार ने ट्रेड डेफिसिट और फॉरेक्स रिजर्व को बचाने के लिए मई में इंपोर्ट टैक्स को **15%** कर दिया था, जिसका असर अब साफ दिखने लगा है।

ट्रेड डेफिसिट पर लगा लगाम

सरकार के इस फैसले का सीधा मकसद फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व को सुरक्षित रखना और मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट को कम करना था। कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, इस फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही (अप्रैल से सितंबर) में सोना आयात USD 19.27 बिलियन रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह USD 26.51 बिलियन था। निर्यात में 23.04% की उछाल और सोने के आयात में कमी के चलते, मंथली ट्रेड डेफिसिट सुधरकर USD 30.21 बिलियन पर आ गया है, जो एक साल पहले USD 33 बिलियन के करीब था।

निवेशकों और रिटेलर्स के लिए क्या हैं रिस्क?

इंपोर्ट टैक्स बढ़ने का सीधा असर सोने की कीमतों पर पड़ा है। ज्वेलरी रिटेलर्स के लिए अब चुनौतियां बढ़ गई हैं। पहला खतरा बिक्री की वॉल्यूम गिरने का है, और दूसरा मार्जिन पर दबाव का। अगर कंपनियां बढ़ती लागत को खुद वहन करती हैं, तो उनके नेट प्रॉफिट पर बुरा असर पड़ सकता है।

इसके अलावा, मार्केट एक्सपर्ट्स ग्रे-मार्केट (Grey Market) के बढ़ने की आशंका जता रहे हैं। जब कानूनी रूप से सोना महंगा होता है, तो अनौपचारिक तरीकों से आने वाले सोने की मात्रा बढ़ सकती है, जिससे संगठित ज्वेलरी प्लेयर्स का मार्केट शेयर प्रभावित हो सकता है।

आगे का रास्ता

अब सबकी नजरें फेस्टिव और वेडिंग सीजन पर टिकी हैं। आने वाली तिमाही के नतीजों में यह साफ हो जाएगा कि क्या बढ़ती कीमतों के बावजूद उपभोक्ता खरीदारी जारी रखेंगे या मांग में सुस्ती आएगी। शेयरधारकों के लिए यही सबसे बड़ा 'की-मॉनिटरेबल' (Key-monitorable) फैक्टर रहेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.