भारत में सोने पर बढ़ते इम्पोर्ट ड्यूटी और GST के कारण अब ग्राहक ग्रे मार्केट (अनौपचारिक बाजार) की ओर रुख कर रहे हैं। इससे संगठित ज्वेलरी रिटेलर्स की मांग पर असर पड़ने की आशंका है और सरकार के लिए ट्रेड डेफिसिट का आकलन करना मुश्किल हो रहा है।
टैक्स के बोझ से बढ़ा ग्रे मार्केट
भारत में सोने के आयात पर 15% की भारी इम्पोर्ट ड्यूटी और ऊपर से 3% GST ने सोने के दाम काफी बढ़ा दिए हैं। कीमत के प्रति संवेदनशील ग्राहक अब ग्रे मार्केट की ओर शिफ्ट हो रहे हैं, जहां नकद लेन-देन के जरिए टैक्स से बचकर वे करीब 6% तक सस्ता सोना खरीद पा रहे हैं।
लिस्टेड ज्वेलर्स की राह कठिन
Titan Company, Kalyan Jewellers और Senco Gold जैसी लिस्टेड कंपनियों के निवेशकों के लिए यह एक बड़ी चिंता का विषय है। पिछले कई सालों से इन बड़ी ब्रांड्स ने ग्राहकों को छोटे और अनौपचारिक ज्वेलर्स से निकालकर अपने पारदर्शी शोरूम्स तक लाने का बड़ा काम किया था, लेकिन टैक्स के अंतर के कारण यह बदलाव सुस्त पड़ सकता है।
सरकार की पॉलिसी और इकॉनमी पर असर
सोना भारत में तेल के बाद दूसरा सबसे ज्यादा आयात किया जाने वाला कमोडिटी है। सरकार ने ट्रेड डेफिसिट को नियंत्रित करने और विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने के लिए टैक्स बढ़ाया था, लेकिन यह कदम डिमांड को कम करने के बजाय उसे 'अंडरग्राउंड' कर रहा है। इससे घरेलू खपत का सही डेटा मिलना मुश्किल हो गया है।
क्या रखें नजर?
ग्रे मार्केट में होने वाले सौदे बिना हॉलमार्किंग और शुद्धता की गारंटी के होते हैं। आगामी त्योहारी और वेडिंग सीजन में अगर यह टैक्स अंतर बरकरार रहा, तो यह चलन और बढ़ सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे प्रमुख ज्वेलरी कंपनियों की अगली तिमाही की अर्निंग्स रिपोर्ट में मैनेजमेंट की कमेंट्री पर पैनी नजर रखें कि क्या इससे उनकी सेल्स वॉल्यूम पर दबाव पड़ रहा है या वे अपनी मार्केट हिस्सेदारी बचाने में कामयाब रही हैं।
