क्यों बढ़ा गोल्ड ईटीएफ में निवेश?
अप्रैल में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया। इस भू-राजनीतिक जोखिम के चलते, निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित करने के लिए गोल्ड ईटीएफ की ओर भारी संख्या में पैसा लगाया। इसका नतीजा यह हुआ कि मार्च के ₹2,266 करोड़ के मुकाबले अप्रैल में इनफ्लो 34% बढ़कर ₹3,040.3 करोड़ तक पहुंच गया।
ग्लोबल मार्केट का भी यही हाल
यह ट्रेंड सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रहा। दुनिया भर के गोल्ड ईटीएफ में भी निवेशकों का भरोसा बढ़ा और अप्रैल में $6.6 बिलियन का इनफ्लो दर्ज किया गया। हालांकि, अप्रैल के दौरान भारत में सोने की कीमत में करीब 3% की गिरावट आई थी, लेकिन यह इनफ्लो दिखाता है कि निवेशक वैल्यू से ज्यादा सुरक्षा को महत्व दे रहे थे।
शेयर बाजार के उछाल के बावजूद गोल्ड की चमक
अप्रैल 2026 में भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखी गई, जहां निफ्टी 24,200 के पार निकल गया। इसके बावजूद, निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ में अपना निवेश बढ़ाया। यह इस बात का संकेत है कि गोल्ड को अभी भी एक 'सेफ हेवन' एसेट (सुरक्षित निवेश) माना जा रहा है, जो इक्विटी मार्केट के उतार-चढ़ाव से अलग चलकर पोर्टफोलियो को बचाता है। अप्रैल के अंत तक, भारत में गोल्ड ईटीएफ का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) बढ़कर ₹1.78 लाख करोड़ हो गया, जो डिजिटल गोल्ड में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
