क्यों गोल्ड ईटीएफ में उमड़ी भीड़?
यह रिकॉर्ड इनफ्लो दिखाता है कि निवेशक शेयरों (Equities) से पैसा निकालकर ऐसे एसेट्स में लगा रहे हैं जिन्हें वे ज्यादा सुरक्षित मानते हैं। इस भारी निवेश की वजह ग्लोबल इकोनॉमिक और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता है। इंटरनेशनल गोल्ड प्राइसेस थोड़ा बढ़कर करीब $4,535.50 प्रति औंस हो गए, लेकिन डॉलर की मजबूती और आने वाले इकोनॉमिक डेटा इसे प्रभावित कर सकते हैं।
ऑयल का सहारा, पर डॉलर का दबाव
ऊंचा क्रूड ऑयल (Crude Oil) प्राइस, जैसे WTI जो $104.74 प्रति बैरल के करीब है, इंफ्लेशन की चिंता बढ़ा रहा है, जिससे आमतौर पर सोने को सपोर्ट मिलता है। इसी बीच, मजबूत होता अमेरिकी डॉलर (U.S. Dollar) सोने को दूसरे देशों की करेंसी में खरीदने वालों के लिए महंगा बना रहा है, जिससे कीमतों पर दबाव आ रहा है। डॉलर इंडेक्स (DXY) करीब 98.50 पर है।
रिकॉर्ड इनफ्लो: रिस्क से दूरी का संकेत
Q1 FY26 में गोल्ड ईटीएफ में ₹31,561 करोड़ का यह अभूतपूर्व निवेश इस बात का साफ संकेत है कि निवेशक रिस्क से बच रहे हैं। सोने की कीमतों में 63% की बढ़ोतरी और इक्विटी से बड़ी निकासी इस रुझान को हवा दे रही है। हालांकि, यह इनफ्लो सोने के वास्तविक प्राइस मूवमेंट्स से थोड़ा अलग दिख सकता है, क्योंकि ग्लोबल ईटीएफ जैसे SPDR Gold Shares (GLD) और iShares Gold Trust (IAU) में क्रमशः $153.51 बिलियन और $70.08 बिलियन का भारी एसेट है, जो दिखाता है कि दुनिया भर के निवेशक सोने को एक अहम एसेट क्लास मानते हैं।
सिल्वर की मिली-जुली चाल
सिल्वर (Silver) की चाल थोड़ी मिली-जुली रही है। इंटरनेशनल स्पॉट सिल्वर करीब $72.69 प्रति औंस पर थोड़ा बढ़ा है, जबकि MCX सिल्वर फ्यूचर्स ₹2,44,027 प्रति किलोग्राम के आसपास मामूली बढ़त दिखा रहे हैं। एनालिस्ट्स (Analysts) सिल्वर के आउटलुक पर सतर्क हैं। UBS ने अपने प्राइस फोरकास्ट कम किए हैं, और 2026 में साइडवेज मूवमेंट की उम्मीद है। उनका मानना है कि मौजूदा ऊंची कीमतें सोलर पावर और ज्वेलरी जैसी इंडस्ट्रीज की डिमांड को नुकसान पहुंचा सकती हैं। UBS के अनुसार, गोल्ड-सिल्वर रेश्यो धीरे-धीरे 75-80 की ओर बढ़ सकता है।
इकोनॉमिक डेटा और भू-राजनीति पर नजर
मार्केट्स अब आने वाली अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल (Non-Farm Payrolls - NFP) रिपोर्ट पर कड़ी नजर रख रहे हैं। यह डेटा फेडरल रिजर्व (Federal Reserve) की पॉलिसी और डॉलर की दिशा तय करने में अहम होगा। मजबूत NFP रिपोर्ट से इंटरेस्ट रेट्स में बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ सकती हैं, जो सोने को कम आकर्षक बनाती है। वहीं, मध्य पूर्व में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) क्रूड ऑयल प्राइसेस को सपोर्ट कर रहे हैं और इंफ्लेशन कंसर्न बढ़ा रहे हैं।
सोने के लिए जोखिम: इंफ्लेशन, रेट्स और डॉलर
मजबूत होता अमेरिकी डॉलर सोने की कीमतों के लिए एक बड़ा जोखिम है। अगर डॉलर इंडेक्स (DXY) 98.50 से ऊपर चढ़ता है, तो यह सोने की डिमांड को कम करेगा। साथ ही, लगातार बनी हुई इंफ्लेशन की चिंताएं, जो ऊंचे क्रूड ऑयल प्राइसेस से और बढ़ी हैं, फेडरल रिजर्व को सख्त मॉनेटरी पॉलिसी अपनाने के लिए मजबूर कर सकती हैं। ऊंचे इंटरेस्ट रेट्स सोने जैसी नॉन-इंटरेस्ट बेयरिंग एसेट्स को होल्ड करने की लागत बढ़ा देते हैं।
एनालिस्ट्स की सोने-चांदी पर राय
2026 के लिए गोल्ड प्राइसेस पर एनालिस्ट्स की राय अलग-अलग है। J.P. Morgan और Wells Fargo जैसे बैंक $6,300 प्रति औंस का टारगेट दे रहे हैं, जबकि Goldman Sachs $5,400 का अनुमान लगा रहा है। साल के अंत 2026 के लिए औसत अनुमान $5,515 प्रति औंस है। Commerzbank का नजरिया थोड़ा सतर्क है, वे $5,000 प्रति औंस के करीब कीमत की उम्मीद कर रहे हैं। सिल्वर के लिए, UBS ने अनुमान कम किए हैं, लेकिन कुछ एनालिस्ट्स $100 प्रति औंस तक की उम्मीद भी कर रहे हैं।
