सोने की मांग में भारी गिरावट! इंपोर्ट ड्यूटी बढ़कर 15% हुई, 10% तक घट सकती है खपत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
सोने की मांग में भारी गिरावट! इंपोर्ट ड्यूटी बढ़कर 15% हुई, 10% तक घट सकती है खपत
Overview

भारत में सोने की मांग में भारी गिरावट आने की आशंका है। इंपोर्ट ड्यूटी में 6% से बढ़ाकर 15% करने के फैसले के बाद 2026 तक सोने की खपत **10%** यानी **50-60 टन** तक कम हो सकती है।

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सोने की मांग पर इंपोर्ट ड्यूटी का बड़ा झटका

भारत में सोने की मांग में 2026 तक 10% की भारी गिरावट आ सकती है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) का अनुमान है कि यह गिरावट करीब 50 से 60 टन तक हो सकती है। इसकी मुख्य वजह सरकार द्वारा सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी (Import Duty) को 6% से बढ़ाकर 15% करना है। यह अब तक की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक है, जिसने पहले की गई कटौती को पलट दिया है। इस फैसले से उपभोक्ताओं के सोने में निवेश और ज्वेलरी खरीदने के रुझान पर बुरा असर पड़ने की उम्मीद है।

ज्वेलरी और निवेश पर क्या होगा असर?

WGC का कहना है कि इस नीतिगत बदलाव से कुल मांग में कमी आएगी और अवैध सोने के व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा सोने की खरीदारी हतोत्साहित करने वाले सार्वजनिक बयानों का भी इस पर असर पड़ेगा। हालांकि, यह उम्मीद की जा रही है कि इंपोर्ट ड्यूटी में बदलाव का असर निवेश वाले सोने (जैसे बार और सिक्के) पर ज्वेलरी की तुलना में ज्यादा होगा। ज्वेलरी, जो कि भारतीय संस्कृति का अहम हिस्सा है, ऐतिहासिक रूप से कीमत में उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक लचीली रही है।

तस्करी का खतरा और अन्य कारक

ड्यूटी में बढ़ोतरी से तस्करी के जोखिम बढ़ने के भी आसार हैं। 2013 से 2016 के बीच ड्यूटी में इजाफे के बाद तस्करी वाले सोने की आवक में सात गुना बढ़ोतरी देखी गई थी। यह दिखाता है कि तस्करी के नेटवर्क तब भी सक्रिय रह सकते हैं जब ड्यूटी स्थिर हो। जुलाई 2022 से जुलाई 2024 के बीच, जब ड्यूटी घटाकर 6% कर दी गई थी, तब अवैध आयात लगभग शून्य हो गया था।

15% की नई ड्यूटी दर अवैध व्यापार को फिर से बढ़ावा दे सकती है। इससे सरकार को टैक्स राजस्व का नुकसान होगा, वैध व्यवसायों के लिए अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा होगी और घरेलू कीमतों की खोज में बाधा आ सकती है। इसके अलावा, प्रधानमंत्री मोदी के सोने की खरीदारी कम करने के बयानों से भी मांग पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की संभावना है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.