भारत में गोल्ड रिटेल डिमांड जुलाई-सितंबर तिमाही में **20-30%** बढ़ी है। शादियों की सीजन के साथ ही Gold ETFs में भी सितंबर महीने में **₹44.5 अरब** का भारी निवेश आया है।
जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में भारतीय बाजार में सोने की मांग ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। बड़े ज्वेलरी रिटेलर्स ने पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 20% से 30% तक की रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की है। इस शानदार प्रदर्शन के पीछे प्रमुख वजह ज्वेलरी चेन द्वारा 42 नए आउटलेट्स का विस्तार है, जिससे सेम-स्टोर सेल्स में भी लगभग 20% की बढ़त देखी गई।
नई स्ट्रैटेजी और बदलता ट्रेंड
बढ़ती कीमतों के बीच ग्राहक अब 'स्मार्ट बाइंग' की ओर शिफ्ट हो गए हैं। लोग भारी गहनों की जगह हल्के और डेली-वियर डिजाइन्स को पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा, पुराने सोने के बदले नया सोना लेने का चलन (Old-gold exchange) बहुत तेजी से बढ़ा है। ज्वेलर्स के अनुसार, कुल सेल्स में एक्सचेंज का हिस्सा 50% से ज्यादा हो गया है, जो पिछली तिमाहियों के मुकाबले 10% अधिक है। यह मॉडल ग्राहकों के लिए बजट फ्रेंडली है और ज्वेलर्स के लिए बुलियन का एक डोमेस्टिक सोर्स बन गया है।
गोल्ड ETF में निवेशकों की रुचि
सितंबर में निवेश के नजरिए से देखें तो Association of Mutual Funds in India (AMFI) के डेटा के मुताबिक Gold ETFs में ₹44.5 अरब का नेट इनफ्लो दर्ज हुआ है, जो पिछले 7 महीनों में सबसे अधिक है। इससे कुल होल्डिंग्स में करीब 3 टन सोना और जुड़ गया है। साथ ही, 1,40,000 नए इन्वेस्टर फोलियो खुले हैं, जो यह बताता है कि निवेशक सोने को अनिश्चितता के दौर में एक सुरक्षित 'हेजिंग' टूल मान रहे हैं।
क्या हैं रिस्क?
हालांकि ग्रोथ मजबूत है, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि सोने की ऊंची कीमतें अगर और बढ़ती हैं, तो इसका असर वॉल्यूम ग्रोथ पर पड़ सकता है। आने वाली तिमाहियों में यह देखना अहम होगा कि क्या ज्वेलर्स अपनी रेवेन्यू ग्रोथ को इसी रफ्तार पर बनाए रख पाते हैं, खासकर तब जब गोल्ड की कीमतों में उतार-चढ़ाव और महंगाई का दबाव बना हुआ है।
