भारत के जेम्स एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट्स (Gems and Jewellery Exports) ने जून 2026 में **26.5%** की शानदार बढ़त दर्ज की है, जो **$2.21 बिलियन** तक पहुंच गए। सोने के गहनों (Gold Jewellery) और लैब-गोन डायमंड (Lab-Grown Diamonds) की मजबूत मांग इस उछाल के पीछे मुख्य वजह है। हालांकि, अप्रैल-जून तिमाही में एक्सपोर्ट ग्रोथ **0.04%** पर सपाट रही, जो वैश्विक आर्थिक दबावों को दर्शाती है।
जून में एक्सपोर्ट्स में आई बड़ी रिकवरी
भारत के जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर (Gems and Jewellery Sector) ने जून 2026 में दमदार वापसी की है। इस महीने ग्रॉस एक्सपोर्ट्स (Gross Exports) में पिछले साल के मुकाबले 26.51% का इजाफा हुआ और यह $2.21 बिलियन तक पहुंच गए। यह रिकवरी खास तौर पर तब आई है जब लंबे समय से वैश्विक मांग कमजोर बनी हुई थी, जिसने एक्सपोर्ट ग्रोथ को पिछले कुछ समय से धीमा कर रखा था।
किस सेगमेंट में हुई सबसे ज्यादा ग्रोथ?
गोल्ड ज्वैलरी एक्सपोर्ट्स इस महीने ग्रोथ के मुख्य ड्राइवर रहे। इनमें 54.5% का उछाल आया और यह $1.09 बिलियन तक पहुंच गए। खास बात यह है कि स्टडेड गोल्ड ज्वैलरी (Studded Gold Jewellery) एक्सपोर्ट्स में 85.35% की जबरदस्त बढ़त देखी गई, जो $633.97 मिलियन तक पहुंच गए। वहीं, प्लेन गोल्ड ज्वैलरी (Plain Gold Jewellery) एक्सपोर्ट्स में 25.34% की बढ़ोतरी के साथ $453.76 मिलियन का आंकड़ा पार किया।
लैब-गोन डायमंड सेगमेंट ने भी सेक्टर की मासिक ग्रोथ में अहम योगदान दिया। पॉलिश किए हुए लैब-गोन डायमंड्स के एक्सपोर्ट्स में जून में 52.25% का उछाल आया और यह $101.35 मिलियन तक पहुंच गए। ये डायमंड्स नेचुरल डायमंड्स के मुकाबले एक किफायती और बेहतर विकल्प साबित हो रहे हैं, खासकर तब जब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कंज्यूमर खर्च करने में हिचकिचा रहे हैं। अप्रैल-जून की पूरी तिमाही के लिए, लैब-गोन डायमंड एक्सपोर्ट्स में 14.92% की पॉजिटिव ग्रोथ जारी रही।
तिमाही के आंकड़े और चुनौतियाँ
जून के पॉजिटिव संकेतों के बावजूद, अप्रैल-जून 2026 की पूरी तिमाही की तस्वीर थोड़ी अलग है। इस तीन महीने की अवधि में कुल ग्रॉस एक्सपोर्ट्स में सिर्फ 0.04% की मामूली ग्रोथ देखने को मिली, जो $6.61 बिलियन था। यह दर्शाता है कि सेक्टर अभी भी फाइनेंशियल ईयर की धीमी शुरुआत से उबर रहा है। इसके अलावा, इसी तिमाही में सेक्टर के ग्रॉस इम्पोर्ट्स (Gross Imports) में 5.9% की गिरावट आई और यह $4.97 बिलियन पर आ गए। यह वैश्विक अनिश्चितता के बीच मैन्युफैक्चरर्स द्वारा सावधानी से इन्वेंटरी मैनेजमेंट का संकेत हो सकता है।
यह इंडस्ट्री लगातार बदलते कंज्यूमर स्पेंडिंग पैटर्न, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। चूँकि भारतीय जेम्स और ज्वैलरी सेक्टर पश्चिमी देशों में एक्सपोर्ट पर काफी निर्भर है, आने वाले महीनों में परफॉरमेंस इस बात पर निर्भर करेगी कि अंतरराष्ट्रीय फेस्टिव सीज़न के दौरान कंज्यूमर सेंटीमेंट कैसा रहता है।
जेम एंड ज्वैलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (Gem & Jewellery Export Promotion Council) के आंकड़ों के अनुसार, सेक्टर की रिकवरी इस बात पर भी निर्भर करेगी कि मैन्युफैक्चरर्स हाल ही में साइन किए गए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स (Free Trade Agreements) के जरिए नए मार्केट्स का कितना फायदा उठा पाते हैं। टाइटन कंपनी (Titan Company) या कल्याण ज्वैलर्स (Kalyan Jewellers) जैसी लिस्टेड कंपनियों पर नजर रखने वाले इन्वेस्टर्स इस बात पर गौर करेंगे कि क्या एक्सपोर्ट वॉल्यूम में यह मासिक बढ़ोतरी, तिमाही मार्जिन में सुधार और भारतीय फेस्टिव सीज़न के दौरान डिमांड में स्थिरता ला पाती है।
