Gems & Jewellery निर्यात में उछाल: वैल्यू-एडेड आइटम्स ने घटते डायमंड ट्रेड की भरपाई की

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AuthorNeha Patil|Published at:
Gems & Jewellery निर्यात में उछाल: वैल्यू-एडेड आइटम्स ने घटते डायमंड ट्रेड की भरपाई की

अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच भारत के रत्न और आभूषण निर्यात में **2%** की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो कुल **$9.17 बिलियन** तक पहुंच गया। यह उछाल स्टडेड गोल्ड और सिल्वर ज्वैलरी की मजबूत मांग के चलते आया है। हालांकि, जहां वैल्यू-एडेड सेगमेंट में अच्छी ग्रोथ देखी गई, वहीं कट और पॉलिश किए हुए डायमंड के ट्रेड में **8%** की गिरावट आई है।

निर्यात के आंकड़े क्या कहते हैं?

अप्रैल-जुलाई 2026 की अवधि में भारत के रत्न और आभूषण निर्यात के मिले-जुले नतीजे सामने आए हैं। कुल निर्यात में 2% की वृद्धि हुई और यह $9.17 बिलियन पर पहुंच गया। लेकिन, विभिन्न उत्पाद श्रेणियों में प्रदर्शन में काफी अंतर रहा। इंडस्ट्री में एक स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है: स्टडेड गोल्ड और सिल्वर ज्वैलरी जैसे वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की मांग बढ़ रही है, जो कट और पॉलिश किए हुए डायमंड के ट्रेड पर पड़ रहे दबाव को कम कर रही है।

ज्वैलरी सेगमेंट में बंपर ग्रोथ

निर्यात में इस ग्रोथ का बड़ा श्रेय हाई-वैल्यू कैटेगरी में आई तेजी को जाता है। स्टडेड गोल्ड ज्वैलरी का एक्सपोर्ट 21% से बढ़कर $2.24 बिलियन हो गया, जबकि सिल्वर ज्वैलरी के एक्सपोर्ट में 72% की भारी उछाल आई और यह $508 मिलियन तक पहुंच गया। यह दिखाता है कि ग्लोबल कंज्यूमर अब सीधे पहनने योग्य तैयार ज्वैलरी को ज्यादा पसंद कर रहे हैं, बजाय कि लूज डायमंड के। इसके विपरीत, पारंपरिक डायमंड सेगमेंट दबाव में है। कट और पॉलिश डायमंड का एक्सपोर्ट 8% घटकर $3.60 बिलियन रह गया। यह भारत के डायमंड कटिंग और पॉलिशिंग हब के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रहा है।

टैक्सेशन बिल से डायमंड ट्रेड को बूस्ट

इंडस्ट्री की पुरानी दिक्कतों को दूर करने के लिए सरकार ने हाल ही में 'टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026' पास किया है। यह कानून खास तौर पर रफ डायमंड के ट्रेड के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इसके तहत, स्पेशल नोटिफाइड जोन में विदेशी कंपनियों को रफ डायमंड ट्रेडिंग पर 15 साल की इनकम टैक्स छूट मिलेगी। पहले भारतीय कंपनियों को रफ डायमंड के लिए भारी आयात पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे सप्लाई चेन में दिक्कतें आती थीं। अब, ग्लोबल माइनिंग कंपनियों के लिए इन जोन के जरिए सीधे ट्रेड करना आसान और टैक्स-एफिशिएंट होगा, जिससे भारत डायमंड ट्रेडिंग का एक ग्लोबल हब बन सकेगा।

जोखिम और आगे का रास्ता

गोल्ड और सिल्वर ज्वैलरी में ग्रोथ के बावजूद, इस सेक्टर के सामने कई जोखिम हैं। ग्लोबल इकोनॉमिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव अमेरिका, यूके और एशियाई देशों जैसे प्रमुख बाजारों में एक्सपोर्ट डिमांड को प्रभावित कर रहे हैं। जुलाई 2026 में गोल्ड की कीमतों में आई 4% की गिरावट ने कुछ समय के लिए मांग को सहारा दिया, लेकिन कीमतों में अस्थिरता एक बड़ा खतरा बनी हुई है। कंपनियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और लग्जरी आइटम्स की घटती मांग के बीच प्रॉफिट मार्जिन को बनाए रखना है। निवेशकों को यह देखना होगा कि नई टैक्स छूट का फायदा इंडस्ट्री अपनी सप्लाई चेन को बेहतर बनाने में कैसे उठाती है, और क्या वैल्यू-एडेड ज्वैलरी का बढ़ता ट्रेंड, डायमंड एक्सपोर्ट में आई गिरावट की भरपाई कर पाता है या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.