सितंबर 2026 में भारत का जेम और ज्वैलरी एक्सपोर्ट **9.43%** बढ़कर **$2.95 बिलियन** पर पहुंच गया है। इस तेजी के पीछे स्टडेड गोल्ड (Studded Gold) और लैब-ग्रोन डायमंड्स की बढ़ती मांग का बड़ा हाथ है, हालांकि सोने की ऊंची कीमतों ने सादे सोने के आभूषणों के एक्सपोर्ट पर दबाव डाला है।
भारत के जेम और ज्वैलरी सेक्टर ने सितंबर 2026 में शानदार रफ्तार पकड़ी है। इस महीने कुल शिपमेंट $2.95 बिलियन तक पहुंच गई है। इस आंकड़े के साथ ही चालू फाइनेंशियल ईयर की पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) में कुल एक्सपोर्ट $14.30 बिलियन रहा है, जो डॉलर के टर्म में 3.07% की मामूली ग्रोथ दिखाता है।
स्टडेड गोल्ड और लैब-ग्रोन डायमंड्स की चमक
सेक्टर में यह रिकवरी हर जगह एक समान नहीं है। ग्रोथ की कमान मुख्य रूप से स्टडेड गोल्ड ज्वैलरी ने संभाली है, जिसके एक्सपोर्ट में पहली छमाही में 31% से ज्यादा का उछाल आया है और यह $3.69 बिलियन तक पहुंच गया है। वहीं, लैब-ग्रोन डायमंड्स का सेगमेंट भी तेजी से अपनी जगह बना रहा है, जिसमें 17.08% की बढ़त के साथ एक्सपोर्ट $685.10 मिलियन रहा। अमेरिका में घटी ड्यूटी और यूके (UK) के साथ हुए नए ट्रेड एग्रीमेंट्स का फायदा घरेलू एक्सपोर्टर्स को बेहतर मार्जिन के रूप में मिल रहा है।
महंगी कीमतों का सादे आभूषणों पर असर
जहां स्टडेड ज्वैलरी चमक रही है, वहीं पारंपरिक सादे सोने के आभूषणों (Plain Gold Jewellery) को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस सेगमेंट का एक्सपोर्ट पहली छमाही में 8.81% गिरकर $2.53 बिलियन पर आ गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह ग्लोबल गोल्ड प्राइस में आया 31.17% का जोरदार उछाल है। सोने की बढ़ती कीमतों ने इंटरनेशनल बायर्स के लिए इन्हें खरीदना महंगा बना दिया है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट (Middle East) के चुनौतीपूर्ण मार्केट कंडीशन्स भी कंपनियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं।
डायमंड सेगमेंट और करेंसी का खेल
कट और पॉलिश्ड डायमंड सेगमेंट की स्थिति मिश्रित है। पहली छमाही में एक्सपोर्ट की वैल्यू में लगभग 7% की गिरावट आई है, लेकिन वॉल्यूम में 4% से अधिक की बढ़ोतरी देखी गई है। इसका मतलब है कि बाजार में सामान ज्यादा बिक रहा है लेकिन कम दाम पर। रुपये में गिरावट ने एक्सपोर्टर्स को थोड़ी राहत दी है, जिससे घरेलू करेंसी में उनकी कमाई सुरक्षित रही है। सितंबर महीने में ही रुपये के टर्म में एक्सपोर्ट 18% बढ़कर ₹28,157.55 करोड़ रहा है।
