भारत के रत्न और आभूषण निर्यात (Gem and Jewellery Exports) जून महीने में **26.51%** की शानदार बढ़ोतरी के साथ **$2.21 बिलियन** पर पहुंच गया। मजबूत मांग और सोने की घटती कीमतों ने इस ग्रोथ को सहारा दिया है। हालांकि, सोने के आयात पर GST से जुड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं, लेकिन यह आंकड़ा सेक्टर की रिकवरी की उम्मीद जगाता है।
Detailed Coverage
जून में निर्यात में दिखी ताबड़तोड़ तेजी
भारत का रत्न और आभूषण उद्योग जून 2026 में एक मजबूत वापसी करते हुए दिखा। पिछले साल के इसी महीने की तुलना में निर्यात में 26.51% की जोरदार बढ़ोतरी हुई, जो कुल $2.21 बिलियन तक पहुंच गया। जेम एंड ज्वेलरी एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (GJEPC) के आंकड़ों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मांग का बढ़ना और सोने की कीमतों में आई गिरावट मुख्य वजहें रहीं। इससे भारतीय निर्यातकों को कॉम्पिटिटिव बने रहने में मदद मिली।
किन प्रोडक्ट्स की हुई धूम?
इस महीने के प्रदर्शन में खास सेगमेंट्स ने अहम भूमिका निभाई। गोल्ड ज्वेलरी निर्यात में 54.50% का बड़ा उछाल आया और यह $1.09 बिलियन तक पहुंच गया। इसमें स्टडेड गोल्ड ज्वेलरी की परफॉर्मेंस तो 85.35% रही। इसके अलावा, लैब-ग्रोन डायमंड सेगमेंट में 52.25% और प्लैटिनम ज्वेलरी में 34.77% की बढ़ोतरी देखी गई। कट और पॉलिश किए हुए डायमंड्स में भी 8.71% की मामूली बढ़त दर्ज की गई।
हालांकि, सभी सेगमेंट्स में एक जैसी तेजी नहीं दिखी। सिल्वर ज्वेलरी और कलर्ड जेमस्टोन निर्यात में गिरावट आई, जो प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में असमान मांग को दर्शाता है। जून के मजबूत आंकड़ों के बावजूद, अप्रैल-जून तिमाही (Q1) में कुल निर्यात $6.61 बिलियन पर लगभग स्थिर रहा, जो डॉलर टर्म्स में सिर्फ 0.04% की मामूली बढ़ोतरी है।
सोने की कीमतें और GST की मार
अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में 10.28% की मासिक गिरावट निर्यातकों के लिए बड़ी राहत लेकर आई, जिससे वे कच्चे माल की लागत को बेहतर ढंग से मैनेज कर पाए। कुवैत और शारजाह जैसे बाजारों में बड़े अंतरराष्ट्रीय एग्जीबिशन में भाग लेने से भी निर्यात को बढ़ावा मिला। लेकिन, सेक्टर अभी भी रेगुलेटरी चुनौतियों से जूझ रहा है। RBI द्वारा नोटिफाई की गई नॉमिनेटेड एजेंसियों के माध्यम से सोने के आयात पर GST की एप्लीकेबिलिटी को लेकर एक तकनीकी मुद्दा चिंता का विषय बना हुआ है, जो एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड मैन्युफैक्चरिंग के लिए सोने की सप्लाई को प्रभावित कर रहा है।
आगे क्या?
इंडस्ट्री को उम्मीद है कि नए मार्केट्स में विस्तार और इंडिया-यूके CETA जैसे संभावित ट्रेड एग्रीमेंट्स से आगे और गति मिलेगी। निवेशकों के लिए, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्यात की यह ग्रोथ कितनी बनी रहती है, कीमती धातुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव मार्जिन को कैसे प्रभावित करता है, और GST से जुड़ी बाधाएं कब दूर होती हैं, क्योंकि ये कच्चे माल की उपलब्धता को सीमित कर रही हैं। यह सेक्टर वैश्विक बाजारों में अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता कैसे बनाए रखता है और इन लॉजिस्टिक और रेगुलेटरी चुनौतियों से कैसे निपटता है, यह आने वाली तिमाहियों में इसके प्रदर्शन को तय करेगा।
