अगस्त 2026 में भारत में फूड इन्फ्लेशन उछलकर **5.95%** पर पहुंच गया है। प्याज, अदरक और लहसुन की कीमतों में आई भारी तेजी के बीच अब निवेशकों की नजरें रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की एमपीसी मीटिंग पर हैं, जहां ब्याज दरों में बढ़ोतरी का डर बना हुआ है।
अगस्त के आंकड़ों में फूड इन्फ्लेशन जुलाई के 5.52% से बढ़कर 5.95% पर पहुंच गया है। रसोई के अहम सामानों की कीमतों में लगी आग इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, प्याज, अदरक और लहसुन की कीमतों में सालाना आधार पर क्रमशः 48.27%, 73.82% और 43.60% की बड़ी तेजी देखी गई है। हालांकि, राहत की बात यह है कि टमाटर और आलू की कीमतों में 31.09% और 13.14% की गिरावट आई है।
RBI की बैठक और मार्केट पर असर
यह महंगाई ऐसे समय पर बढ़ी है जब रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक 5 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2026 तक चल रही है। मार्केट में इस बात की चर्चा तेज है कि आरबीआई रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो कंपनियों की बोरिंग कॉस्ट बढ़ेगी और कंज्यूमर डिमांड पर बुरा असर पड़ सकता है।
रिटेल और FMCG सेक्टर पर दबाव
महंगाई बढ़ने से आम परिवारों का बजट बिगड़ने का खतरा है, जिससे लोग अपनी जरूरत की चीजों के अलावा बाकी खर्चों में कटौती करेंगे। इससे FMCG और रिटेल कंपनियों के मुनाफे (Profit Margins) पर दबाव आ सकता है। अगर कंपनियां बढ़ती लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालती हैं, तो सेल्स वॉल्यूम घटने का डर भी बना हुआ है।
इस उतार-चढ़ाव के पीछे अनियमित मानसून और सप्लाई चेन की दिक्कतों को जिम्मेदार माना जा रहा है। अब निवेशकों को आरबीआई के फैसलों का इंतजार है, जो तय करेगा कि आने वाले त्योहारों के सीजन में मार्केट का मूड कैसा रहेगा।
