प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के बाद भारत में सोने की मांग में **10-12%** की गिरावट की आशंका है। हालांकि, रिकॉर्ड कीमतों और पुरानी ज्वेलरी एक्सचेंज करने के नए ट्रेंड से ज्वेलर्स को अभी भी कमाई बढ़ने की उम्मीद है।
बाजार पर कीमतों का असर
सोने की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे आम खरीदार की जेब पर भारी बोझ पड़ा है। सितंबर 2025 में सोने की कीमत करीब ₹11,100 प्रति ग्राम थी, जो सितंबर 2026 तक बढ़कर ₹15,500 के स्तर पर पहुंच गई है। यह करीब 39% की भारी उछाल है। इसी के चलते इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) का मानना है कि इस साल त्योहारी सीजन में वॉल्यूम के लिहाज से डिमांड 10-12% तक कम हो सकती है।
रिटेलर्स की बदली रणनीति
कम वॉल्यूम के बावजूद बड़ी कंपनियां मुनाफे को लेकर चिंतित नहीं हैं। Senco Gold & Diamonds जैसी कंपनियां इस फाइनेंशियल ईयर में 25% से अधिक रेवेन्यू ग्रोथ का लक्ष्य लेकर चल रही हैं। इसके लिए कंपनियां हल्के वजन वाले आभूषण और डायमंड कलेक्शन पर जोर दे रही हैं।
सबसे बड़ा बदलाव 'ओल्ड-गोल्ड एक्सचेंज' प्रोग्राम्स में देखने को मिल रहा है। अब ग्राहक नए गहने खरीदने के लिए अपना पुराना सोना एक्सचेंज कर रहे हैं। कई रिटेलर्स के लिए कुल बिजनेस का करीब 50% हिस्सा इसी एक्सचेंज से आ रहा है।
संगठित बनाम असंगठित बाजार
CRISIL Ratings के मुताबिक, छोटे स्थानीय ज्वैलर्स से मार्केट शेयर बड़ी ब्रांडेड कंपनियों की तरफ शिफ्ट हो रहा है। FY28 तक संगठित खिलाड़ियों का मार्केट शेयर 50% तक पहुंचने का अनुमान है, जो FY25 में 38% था। हालांकि, 15% कस्टम ड्यूटी और बढ़ती वोलेटिलिटी जैसे रिस्क अभी भी सेक्टर के लिए चुनौती बने हुए हैं। आने वाले समय में नवरात्रि और शादियों का सीजन यह तय करेगा कि क्या ये नई रणनीतियां बिक्री में आई गिरावट की भरपाई कर पाएंगी।
