ज़रूरी कच्चे माल की सुरक्षा
IFFCO, प्रदीप फॉस्फेट्स (Paradeep Phosphates), कोरोमंडल इंटरनेशनल लिमिटेड (Coromandel International Ltd) और गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स (Gujarat State Fertilizers & Chemicals) जैसी भारत की दिग्गज फर्टिलाइजर कंपनियां एक बड़ी खरीदारी के लिए एकजुट हो गई हैं।
इंडियन पोटाश लिमिटेड (Indian Potash Ltd.) के नेतृत्व वाले इस समूह ने फॉस्फेटिक फर्टिलाइजर के लिए एक महत्वपूर्ण कच्चा माल, सल्फर की 600,000 मीट्रिक टन मात्रा के लिए टेंडर जारी किया है। यह टेंडर साल की दूसरी छमाही में डिलीवरी के लिए है, जो सप्लाई चेन की संभावित समस्याओं और वैश्विक कीमतों में वृद्धि से निपटने के लिए एक रणनीतिक कदम है।
यह संयुक्त प्रयास कृषि इनपुट पर भारत की आयात निर्भरता को उजागर करता है। यह अप्रत्याशित मौसम के पैटर्न और सामान्य से कम मानसून की संभावनाओं के बीच आया है। रबी फसल के मौसम के लिए पर्याप्त कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु यह समय महत्वपूर्ण है।
खेती पर भू-राजनीतिक जोखिम
पश्चिम एशिया की वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में अस्थिरता पैदा कर रही है। क्षेत्रीय संघर्षों के कारण सल्फर की कीमतों में पहले ही दोगुना उछाल आ चुका है।
होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे प्रमुख शिपिंग मार्गों में व्यवधान, भारत में सल्फर और डाई-अमोनियम फॉस्फेट (di-ammonium phosphate - DAP) जैसी आवश्यक सामग्रियों के आयात के लिए सीधा खतरा पैदा करते हैं।
इस तरह के व्यवधान भारत के फर्टिलाइजर सब्सिडी कार्यक्रम को काफी प्रभावित कर सकते हैं, जिससे लागत बढ़ सकती है और सरकारी खजाने पर दबाव पड़ सकता है। फर्टिलाइजर कंपनियों का यह सक्रिय टेंडर इन दबावों की सीधी प्रतिक्रिया है। इसका लक्ष्य सप्लाई सुनिश्चित करना और उत्पादकों तथा भारतीय किसानों, दोनों पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव को कम करना है।
