प्याज की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश के 19 प्रमुख शहरों में अब प्याज **₹35** प्रति किलो के रियायती रेट पर उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि आम जनता को **₹50-60** के रिटेल भाव से राहत मिल सके।
प्याज की आसमान छूती कीमतों को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने अपने मार्केट इंटरवेंशन (Market Intervention) का दायरा बढ़ा दिया है। दिल्ली समेत कई शहरों में प्याज ₹50-60 प्रति किलो तक बिक रहा था, जिसे देखते हुए सरकार ने NAFED, NCCF और केंद्रीय भंडार जैसी सहकारी एजेंसियों के जरिए इसे ₹35 प्रति किलो के फिक्स्ड रेट पर बेचना शुरू कर दिया है।\n\n### कैसे पहुंचेगा लोगों तक प्याज?\n\nइस अभियान को सफल बनाने के लिए सरकार मोबाइल वैन और फेयर प्राइस शॉप्स का इस्तेमाल कर रही है। सबसे खास पहल है 'कांदा एक्सप्रेस' (Kanda Express), जो नासिक के प्रोडक्शन हब से सीधे बड़े शहरों तक बफर स्टॉक पहुंचा रही है। सरकार ट्रांसपोर्टेशन और लॉजिस्टिक्स का खर्च खुद उठा रही है ताकि रिटेल और होलसेल प्राइस का गैप कम हो सके।\n\n### निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?\n\nइन्वेस्टर नजरिए से यह खबर काफी अहम है क्योंकि फूड इन्फ्लेशन कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) का बड़ा हिस्सा है। अगर खाने-पीने की चीजें महंगी रहती हैं, तो इसका सीधा असर हेडलाइन इन्फ्लेशन पर पड़ता है, जो अंततः रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की ब्याज दरों (Interest Rates) के फैसलों को प्रभावित करता है। इसके अलावा, महंगाई बढ़ने से आम आदमी की खर्च करने की ताकत (Discretionary Spending) कम हो जाती है, जो कंज्यूमर सेक्टर की कंपनियों के नतीजों पर असर डाल सकती है।\n\n### आगे की चुनौतियां\n\nहालांकि, सरकार की इस कोशिश के सामने लॉजिस्टिक्स की देरी और प्याज के जल्दी खराब होने जैसी चुनौतियां भी हैं। इसके अलावा, प्राइवेट ट्रेडर्स की जमाखोरी भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। सरकार ने साफ कर दिया है कि वे इन्वेंट्री लेवल पर नजर बनाए हुए हैं और बाजार को स्टेबल करने के लिए आगे भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल, बाजार के खिलाड़ियों की नजर अब आने वाले फूड इन्फ्लेशन के आंकड़ों और सरकार के अगले फैसलों पर टिकी है।
