Metal Scrap Import: भारत में बदल सकते हैं स्क्रैप इंस्पेक्शन नियम, इंडस्ट्री को मिलेगी बड़ी राहत?

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AuthorMehul Desai|Published at:
Metal Scrap Import: भारत में बदल सकते हैं स्क्रैप इंस्पेक्शन नियम, इंडस्ट्री को मिलेगी बड़ी राहत?

भारत सरकार मेटल स्क्रैप के अनिवार्य इंस्पेक्शन को विदेश से हटाकर घरेलू पोर्ट्स पर शिफ्ट करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इससे उन कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है जो सालाना **13 मिलियन मीट्रिक टन** स्क्रैप का आयात करती हैं।

आयात प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी

सरकार इस समय मेटल स्क्रैप इंपोर्ट से जुड़े एक बड़े नीतिगत बदलाव की समीक्षा कर रही है। 'Material Recycling Association of India' ने मांग की है कि स्क्रैप के अनिवार्य इंस्पेक्शन को ओरिजिन देश से हटाकर भारतीय पोर्ट्स पर शिफ्ट किया जाए। वर्तमान नियमों के तहत, शिपमेंट लोड होने से पहले विदेश में ही अधिकृत एजेंसियों से जांच करवाना अनिवार्य है, ताकि रेडियोएक्टिव या खतरनाक सामग्री भारत न पहुंचे।

क्यों है बदलाव की जरूरत?

इंडस्ट्री बॉडी का तर्क है कि मौजूदा सिस्टम से सप्लाई चेन में भारी बाधा आ रही है। भारत में हर दिन करीब 2,500 कंटेनर आते हैं, और 160 से अधिक देशों से स्क्रैप मंगवाने के कारण इंस्पेक्शन एजेंसियों की कमी से कंपनियों को भारी नुकसान होता है। कहीं-कहीं तो केवल एक ही सर्विस प्रोवाइडर होने के कारण इंस्पेक्शन की लागत बढ़ जाती है और काम में देरी होती है।

सरकार का रुख और निवेशकों के लिए मायने

'Directorate General of Foreign Trade' (DGFT) इस प्रस्ताव की जांच कर रही है, लेकिन सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए विभाग अभी सतर्क है। सरकार का मुख्य डर यह है कि अगर जांच भारत में होगी, तो खतरनाक सामग्री सीधे भारतीय तटों तक पहुंच सकती है।

निवेशकों के लिए यह खबर अहम है क्योंकि अगर यह नियम लागू होता है, तो मेटल रीसाइक्लिंग और सेकेंडरी स्टील कंपनियों की ऑपरेशनल कॉस्ट कम हो सकती है। हालांकि, सरकार इस बदलाव के साथ कड़ी निगरानी भी रख सकती है, जिसका सीधा असर कंपनियों के मार्जिन पर पड़ेगा। बाजार को अब इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि क्या सरकार पूरी तरह इंस्पेक्शन पॉइंट शिफ्ट करेगी या फिर केवल कुछ देशों के लिए ढील देगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.