रिकॉर्ड **120.65 मिलियन टन** गेहूं उत्पादन के बाद सरकार ने निर्यात पर लगी **4 साल** पुरानी रोक हटा दी है। हालांकि, डोमेस्टिक कॉस्ट और लॉजिस्टिक्स की चुनौतियां एक्सपोर्ट वॉल्यूम को सीमित कर सकती हैं।
नीति में बड़ा बदलाव
डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) ने 24 अगस्त, 2026 को आधिकारिक अधिसूचना जारी कर गेहूं, मैदा और सूजी के निर्यात को 'प्रतिबंधित' (Prohibited) श्रेणी से हटाकर 'मुक्त' (Free) कर दिया है। यह फैसला रिकॉर्ड-तोड़ पैदावार के बाद आया है, जिससे देश के बफर स्टॉक में भारी उछाल देखा गया है।
बफर स्टॉक और मार्केट रिएक्शन
2025-26 सीजन में 120.65 मिलियन टन का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है। फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) के पास वर्तमान में 50 मिलियन टन से अधिक का स्टॉक है, जो 5 साल के उच्चतम स्तर पर है। इस फैसले के बाद लखनऊ और हरदोई जैसे कृषि मंडियों में गेहूं की थोक कीमतों में तत्काल तेजी देखने को मिली है।
एक्सपोर्ट के सामने चुनौतियां
एक्सपोर्टर्स के लिए राह आसान नहीं है। कांडला पोर्ट पर भारतीय गेहूं की फ्री-ऑन-बोर्ड कीमत लगभग $325 प्रति टन है, जबकि रूस और ऑस्ट्रेलिया जैसे ग्लोबल खिलाड़ी $295 प्रति टन या उससे भी कम भाव पर माल दे रहे हैं। लॉजिस्टिक्स की उच्च लागत के कारण भारतीय निर्यात फिलहाल नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों तक सीमित रहने की उम्मीद है।
निवेशकों के लिए जोखिम और अवसर
निवेशकों को एलन निनो (El Nino) जैसी वेदर कंडीशंस पर नजर रखनी होगी, जो आगामी रबी सीजन को प्रभावित कर सकती हैं। यदि सप्लाई में कमी आती है, तो खाद्य सुरक्षा के चलते सरकार दोबारा प्रतिबंध लगाने के लिए मजबूर हो सकती है। आने वाले दो क्वार्टर में निर्यात की रफ्तार और घरेलू महंगाई दर पर नजर रखना शेयरधारकों के लिए अहम होगा।
