भारत सरकार ने बैंकों और नॉमिनेटेड एजेंसियों के लिए सोने, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर मिलने वाली **3%** IGST छूट को हटा दिया है। **1 अप्रैल 2026** से प्रभावी हुए इस बदलाव का मकसद टैक्स नियमों में एकरूपता लाना और फॉरेक्स आउटफ्लो को कंट्रोल करना है।
भारत सरकार ने आधिकारिक तौर पर उन टैक्स रियायतों को बंद कर दिया है, जिसके तहत पहले बैंक और अधिकृत एजेंसियां सोना, चांदी और प्लेटिनम के आयात पर 3% IGST से छूट पाती थीं। रेवेन्यू सेक्रेटरी अरविंद श्रीवास्तव ने साफ किया है कि 31 मार्च 2026 के बाद इस छूट को आगे नहीं बढ़ाया गया है। अब सभी फाइनेंशियल संस्थानों को इंपोर्ट के समय ही यह टैक्स चुकाना होगा।
लिक्विडिटी और ऑपरेशनल कॉस्ट पर असर
बैंकों और अधिकृत एजेंसियों के लिए सबसे बड़ा बदलाव कैश फ्लो का है। चूंकि अब 3% IGST का भुगतान एडवांस में करना होगा, इसलिए इन संस्थानों को अब समान मात्रा में बुलियन इंपोर्ट करने के लिए ज्यादा वर्किंग कैपिटल की जरूरत होगी। इससे कीमती धातुओं को होल्ड करने की लागत यानी 'कैरिंग कॉस्ट' बढ़ जाएगी। एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बढ़ी हुई लागत का असर सप्लाई चेन पर पड़ेगा, जिससे ज्वैलर्स और आम ग्राहकों के लिए सोने-चांदी के दाम बढ़ सकते हैं।
फॉरेक्स मैनेजमेंट की तैयारी
यह फैसला सरकार की विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) को मैनेज करने की रणनीति का हिस्सा है। सरकार पहले ही मई 2026 में सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाकर 15% और प्लेटिनम पर 15.4% कर चुकी है। अब बैंकों की टैक्स छूट खत्म करके सरकार इंपोर्ट चैनल्स के बीच समानता लाना चाहती है ताकि ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) को काबू में रखा जा सके।
हालांकि, बाजार के जानकारों का कहना है कि लागत बढ़ने से ग्रे मार्केट (Grey Market) या अनरेगुलेटेड चैनलों के बढ़ने का जोखिम भी बना रहता है। अब निवेशकों की नजर आने वाले महीनों के इंपोर्ट डेटा पर होगी, जिससे यह साफ होगा कि क्या घरेलू डिमांड इस नई टैक्स व्यवस्था के बाद भी मजबूत बनी रहती है या नहीं।
