त्योहारी सीजन से ठीक पहले एडिबल ऑयल के दाम आसमान छू रहे हैं। ग्लोबल सप्लाई चेन में बाधा और भू-राजनीतिक तनाव के चलते तेल की कीमतों में **18%** तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता के बजट के साथ-साथ FMCG कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर भी बड़ा असर पड़ने की आशंका है।
त्योहारी मांग के चरम पर पहुंचने से ठीक पहले भारत का एडिबल ऑयल सेक्टर भारी अस्थिरता से गुजर रहा है। रिटेल मार्केट में सनफ्लावर ऑयल 18%, पाम ऑयल 14% और सोयाबीन ऑयल 12% तक महंगा हो गया है। इसके अलावा मूंगफली और सरसों के तेल में भी क्रमशः 9% और 7% की तेजी देखी गई है।
ग्लोबल संकट का असर
भारत अपनी जरूरत का 50% से ज्यादा तेल आयात करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम का सीधा असर हमारी कीमतों पर पड़ता है। वेस्ट एशिया में तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे रूट पर अनिश्चितता के कारण ट्रांसपोर्टेशन और प्रोसेसिंग कॉस्ट बढ़ गई है। इसके साथ ही, इंडोनेशिया और ब्राजील जैसे देशों में बायो-डीजल के लिए वेजिटेबल ऑयल के डायवर्जन और 'अल नीनो' के चलते फसल प्रभावित होने से ग्लोबल स्टॉक कम हो गया है, जो कीमतों में आग लगा रहा है।
निवेशकों के लिए जोखिम
1 सितंबर 2026 को सरकार ने कस्टम टैरिफ वैल्यू में बदलाव किया है ताकि मार्केट को कंट्रोल किया जा सके। हालांकि, निवेशकों के लिए चिंता का बड़ा कारण FMCG और रिफाइनिंग कंपनियों का मार्जिन है। अब कंपनियों के सामने यह कठिन चुनौती है कि वे बढ़ी हुई इनपुट कॉस्ट को खुद झेलें या ग्राहकों पर बोझ डालें। कीमतों में बढ़ोतरी से डिमांड घटने का खतरा भी बना हुआ है, जिसका सीधा असर कंपनियों की सेल्स वॉल्यूम पर पड़ सकता है। आने वाली तिमाहियों में इन कंपनियों का वर्किंग कैपिटल मैनेजमेंट और प्रॉफिट मार्जिन बचाए रखने की क्षमता ही निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होगी।
