Edible Oil Imports: त्योहारी सीजन में भारत का आयात **26 महीने** के उच्चतम स्तर पर, रिफाइनर्स की बढ़ सकती है टेंशन

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AuthorAditya Rao|Published at:
Edible Oil Imports: त्योहारी सीजन में भारत का आयात **26 महीने** के उच्चतम स्तर पर, रिफाइनर्स की बढ़ सकती है टेंशन

त्योहारी सीजन में मांग और सरकारी ड्यूटी में कटौती के चलते अक्टूबर 2026 में भारत का एडिबल ऑयल इंपोर्ट **1.74 मिलियन मीट्रिक टन** के **26 महीने** के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गया है।

भारत, जो दुनिया में वेजिटेबल ऑयल का सबसे बड़ा कंज्यूमर है, ने अक्टूबर 2026 में आयात में भारी उछाल दर्ज किया है। कुल आयात 1.74 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो पिछले महीने के मुकाबले 13% अधिक है और पिछले दो सालों में सबसे बड़ा आंकड़ा है। इस तेजी की मुख्य वजह दिवाली के सीजन के लिए लोकल रिफाइनर्स द्वारा स्टॉक जमा करना रही।

रिकॉर्ड वॉल्यूम और पॉलिसी का असर

अक्टूबर में सोयाबीन ऑयल का आयात रिकॉर्ड 6,53,000 मीट्रिक टन पर पहुंच गया। पाम ऑयल के शिपमेंट में 6% की वृद्धि के साथ यह 8,66,000 मीट्रिक टन हो गया, जबकि सनफ्लावर ऑयल का वॉल्यूम दोगुना होकर 2,23,000 मीट्रिक टन पर पहुंच गया। यह स्टॉकपिलिंग सरकार द्वारा सितंबर में क्रूड और रिफाइंड ऑयल पर बेसिक इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की वजह से संभव हो पाई, ताकि फेस्टिव सीजन में रिटेल कीमतें काबू में रहें।

रिफाइनर्स के लिए फाइनेंशियल रिस्क

बढ़ता इंपोर्ट भले ही मजबूत मांग का संकेत दे, लेकिन सेक्टर के सामने चुनौतियां भी कम नहीं हैं। भारतीय रुपया साल-दर-साल लगभग 8.1% कमजोर हुआ है, जिससे इंपोर्ट की लागत (Landed Cost) काफी बढ़ गई है। घरेलू रिफाइनर्स के लिए यह स्थिति मुश्किल है क्योंकि उन्हें अधिक वर्किंग कैपिटल की जरूरत पड़ रही है और ग्लोबल कमोडिटी प्राइसेज में उतार-चढ़ाव से इन्वेंट्री वैल्यूएशन प्रभावित हो सकता है। एनालिस्ट्स को रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद तो है, लेकिन मार्जिन कंप्रेशन का बड़ा रिस्क बना हुआ है।

ग्लोबल सप्लाई पर निर्भरता

भारत का एडिबल ऑयल उद्योग काफी हद तक इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेंटीना, ब्राजील, रूस और यूक्रेन जैसे देशों से होने वाले आयात पर निर्भर है। इन देशों में बायोफ्यूल नियमों में बदलाव या लॉजिस्टिकल दिक्कतें सीधे तौर पर भारतीय मार्केट में कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं। इन्वेस्टर्स को सलाह है कि वे ग्लोबल सप्लाई चेन के साथ-साथ घरेलू ऑपरेशंस की लागत पर भी नजर रखें, क्योंकि ये फैक्टर्स फाइनेंशियल ईयर के आखिरी क्वार्टर में कंपनियों की प्रॉफिटेबिलिटी तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.