त्योहारी सीजन में मांग को पूरा करने के लिए भारतीय रिफाइनर्स ने अगस्त में **1.54 मिलियन टन** खाद्य तेल का आयात किया है, जो पिछले **11 महीनों** का उच्चतम स्तर है।
त्योहारों के दौरान बाजार में सप्लाई की कोई कमी न हो, इसके लिए रिफाइनर्स ने अगस्त में आक्रामक तरीके से खरीदारी की है। सितंबर से नवंबर के बीच मांग का पीक सीजन होता है, जिसे देखते हुए कंपनियां अभी से स्टॉक जमा करने में जुटी हैं।\n\n### कमोडिटी मिक्स में बड़े बदलाव\nअगस्त में सोयबीन तेल (Soyoil) का आयात रिकॉर्ड 601,000 टन पर पहुंच गया, जो कि महीने-दर-महीने 21% की बढ़ोतरी है। दूसरी ओर, सनफ्लावर ऑयल के आयात में 38% की बड़ी गिरावट आई और यह 157,000 टन पर सिमट गया। इसका मुख्य कारण ब्लैक सी (Black Sea) रूट पर सप्लाई चेन में आ रही दिक्कतें हैं। साथ ही, पाम ऑयल का आयात भी 7% बढ़कर 780,000 टन हो गया है।\n\n### निवेशकों के लिए जोखिम और संकेत\nइस भारी-भरकम खरीदारी से कंपनियों का वर्किंग कैपिटल काफी ब्लॉक हो गया है। निवेशकों को दो मुख्य बातों पर नजर रखनी चाहिए:\n\n1. करेंसी रिस्क: भारत अपनी अधिकांश जरूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आने पर कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है।\n2. मार्जिन प्रेशर: अगर कंपनियां बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर नहीं डाल पाईं, तो उनके नेट प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है।\n\nआने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या रिटेल डिमांड इतनी मजबूत रहती है कि कंपनियां अपनी बढ़ी हुई इन्वेंट्री कॉस्ट की भरपाई कर सकें।
