बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए Food Corporation of India (FCI) ने अपनी साप्ताहिक गेहूं नीलामी को लगभग दोगुना बढ़ाकर **1.99 लाख टन** कर दिया है। सरकार की इस कोशिश का मकसद बाजार में सप्लाई बढ़ाकर कीमतों को स्थिर करना है।
महंगाई को काबू में करने के लिए सरकार अब एक्शन मोड में है। Food Corporation of India (FCI) ने अपनी साप्ताहिक नीलामी में गेहूं की उपलब्धता को 1.01 लाख टन से बढ़ाकर 1.99 लाख टन कर दिया है। 4 नवंबर से शुरू हो रही यह नई योजना ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) का हिस्सा है।
राज्यों के लिए अलग-अलग कोटा
इस सप्लाई बढ़ोतरी का असर देश भर में दिखेगा। पंजाब को सबसे ज्यादा 44,000 टन का आवंटन मिला है। इसके अलावा हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े उत्पादक राज्यों में भी लिमिट बढ़ाई गई है। दिल्ली, असम और कर्नाटक जैसे राज्यों के लिए कोटा 5,000 टन से बढ़ाकर 12,000 टन कर दिया गया है।
FMCG सेक्टर पर क्या असर होगा?
बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि सरकार का यह कदम सफल रहता है और कमोडिटी की कीमतें घटती हैं, तो बिस्किट, ब्रेड और आटा बनाने वाली FMCG कंपनियों को बड़ी राहत मिल सकती है। पिछले कुछ समय से कच्चा माल महंगा होने के कारण इन कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना हुआ था।
उद्योग जगत की चिंताएं
हालांकि, MSME Welfare Association ने कुछ व्यावहारिक दिक्कतों की ओर इशारा किया है। उनका कहना है कि बोली लगाने की मात्रा पर सख्त कैप और सरकार द्वारा तय की गई ऊंची रिजर्व कीमतें, छोटे मिलर्स और प्रोसेसर के लिए इसे थोड़ा कठिन बना सकती हैं। बाजार की नजर अब इस पर है कि क्या यह बढ़ा हुआ स्टॉक वास्तव में छोटे खरीदारों तक पहुंच पाएगा या नहीं।
