India Silver Duty Hike: चांदी हुई महंगी! सरकार के फैसले से बढ़ी स्मगलिंग की चिंता, डिमांड पर असर नहीं

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AuthorMehul Desai|Published at:
India Silver Duty Hike: चांदी हुई महंगी! सरकार के फैसले से बढ़ी स्मगलिंग की चिंता, डिमांड पर असर नहीं
Overview

भारत सरकार ने कीमती धातुओं, खासकर चांदी (Silver) और सोने (Gold) के इम्पोर्ट पर बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इन पर इम्पोर्ट ड्यूटी को दोगुना करके **15%** कर दिया है, जिससे इम्पोर्ट घटने और भारतीय रुपए को सहारा मिलने की उम्मीद है। लेकिन, इस फैसले से स्मगलिंग (Smuggling) और गैर-कानूनी बाजार (Grey Market) के बढ़ने का खतरा भी मंडराने लगा है।

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सरकार ने कीमती धातुओं के इम्पोर्ट को लेकर अपना रुख और सख्त कर दिया है। चांदी (Silver) की कई प्रमुख कैटेगरी को अब 'फ्री' स्टेटस से हटाकर 'रेस्ट्रिक्टेड' (Restricted) स्टेटस में डाल दिया गया है। इसका मतलब है कि अब इनके इम्पोर्ट के लिए सरकारी मंजूरी और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की निगरानी की ज़रूरत होगी। यह कदम वैश्विक कीमतों में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक (Geopolitical) अनिश्चितताओं के बीच देश के इम्पोर्ट बिल को बेहतर ढंग से मैनेज करने के बड़े प्रयास का हिस्सा है।

सोने (Gold) और चांदी (Silver) पर इम्पोर्ट ड्यूटी में भी भारी बढ़ोतरी की गई है। यह ड्यूटी 6% से दोगुनी होकर 15% कर दी गई है। इस तेज बढ़ोतरी का मकसद आने वाले शिपमेंट्स को कम करना और कमजोर चल रहे भारतीय रुपए (Indian Rupee) को सहारा देना है। फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में, भारत ने सोने का रिकॉर्ड $71.98 बिलियन और चांदी का $12 बिलियन इम्पोर्ट किया था। इससे $333.2 बिलियन का बड़ा ट्रेड डेफिसिट (Trade Deficit) सामने आया था। इसी दौरान सोने की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल आया, जो FY25 में लगभग ₹76,617 प्रति किलोग्राम से बढ़कर FY26 में लगभग ₹99,825 प्रति किलोग्राम हो गया, जिससे इम्पोर्ट की लागत और बढ़ गई।

इंडस्ट्री से जुड़े समूह, जैसे कि ऑल इंडिया जेम्स एंड ज्वैलरी काउंसिल (All India Gems and Jewellery Council), चिंतित हैं। उनका कहना है कि अतीत में ऐसी ऊंची ड्यूटी ने डिमांड को रोका नहीं है, बल्कि कीमतों को बढ़ाया है और सबसे अहम, गैर-कानूनी व्यापार (Illegal Trade) को बढ़ावा दिया है। 2024 के मध्य में ड्यूटी कम होने के बाद स्मगलिंग में भारी कमी आई थी। लेकिन, वर्तमान ड्यूटी बढ़ोतरी से गैर-कानूनी बाजार (Grey Market) ऑपरेटर्स को लगभग 18% का मुनाफा हो सकता है, जबकि पहले यह 9% के आसपास था। मुनाफे का यह बढ़ता मार्जिन स्मगलिंग को वापस ला सकता है, एक ऐसी समस्या जो 2023 में 156.1 टन तक देखी गई थी और फिर 2025 में घटकर 20.4 टन रह गई थी। इससे सरकारी राजस्व (Government Revenue) कम हो सकता है और एक अनौपचारिक अर्थव्यवस्था (Unofficial Economy) खड़ी हो सकती है।

भारत में सोने और चांदी की चाहत गहरी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ी है। इन्हें धन के भंडार (Store of Wealth), निवेश (Investment) और उत्सवों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। यह डिमांड कीमतों में बढ़ोतरी या इम्पोर्ट की कमी से आसानी से नहीं हिलती। एक्सपर्ट्स का मानना है कि कंज्यूमर्स (Consumers) या तो ज्यादा कीमत चुकाएंगे या फिर गैर-कानूनी रास्ते तलाशेंगे, बजाय इसके कि वे खरीदारी छोड़ दें, खासकर जब लीगल इम्पोर्ट बहुत महंगे हो जाएं। हालांकि, RBI और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) अधिकृत बैंकों के ज़रिए इम्पोर्ट पर नज़र रखते हैं, लेकिन इससे व्यापारों के लिए एडमिनिस्ट्रेटिव हर्डल्स (Administrative Hurdles) खड़े हो सकते हैं। खास तौर पर चांदी के गहनों के इम्पोर्ट के लिए लाइसेंस और मंजूरी की ज़रूरत, बिज़नेस के लिए देरी का सबब बन सकती है।

सरकारी प्रयासों के बावजूद, भारत की कीमती धातुओं की डिमांड के पीछे के मूल कारण मजबूत बने हुए हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना कंज्यूमर और एक प्रमुख चांदी यूजर है, इसलिए इसके इम्पोर्ट ट्रेंड्स वैश्विक स्तर पर मायने रखते हैं। सप्लाई में कमी के बावजूद, भारत की नीतियां अल्पकालिक (Short-term) वित्तीय जरूरतों पर केंद्रित हैं। सरकार सख्त नियमों के बजाय कीमतों का इस्तेमाल कर रही है, उम्मीद है कि इससे बाजार लचीले बने रहेंगे। हालांकि, पिछला अनुभव बताता है कि ये नीतियां लंबी अवधि की डिमांड को नहीं बदल पाएंगी। बल्कि, यह ट्रेड को गैर-कानूनी चैनलों में शिफ्ट कर सकती हैं और घरेलू कीमतों को बढ़ा सकती हैं। इतिहास गवाह है कि फिस्कल पॉलिसी (Fiscal Policy) का भारत की सांस्कृतिक और निवेश की चाहत पर भारी पड़ना मुश्किल है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.