Cotton Association of India (CAI) ने **2026-27** सीजन के लिए कपास उत्पादन के अनुमान जारी किए हैं। भीषण सूखे के चलते उत्पादन गिरकर **280 लाख गांठ** रहने की संभावना है, जिससे टेक्सटाइल इंडस्ट्री में सप्लाई का संकट खड़ा हो सकता है।
टेक्सटाइल और स्पिनिंग इंडस्ट्री के लिए आने वाला समय मुश्किल भरा हो सकता है। Cotton Association of India (CAI) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल उत्पादन पिछले सीजन की 325.69 लाख गांठ के मुकाबले घटकर 280 लाख गांठ तक सिमट सकता है। इस गिरावट की मुख्य वजह देश के सेंट्रल और साउथ जोन में पड़ा सूखा और खेती के रकबे में आई कमी है।
मार्जिन पर असर और सप्लाई की चुनौती
इन्वेस्टर्स के लिए चिंता की बात यह है कि खपत स्थिर बनी हुई है, जो 365 लाख गांठ के स्तर पर है। जब घरेलू सप्लाई कम होती है और डिमांड ज्यादा, तो स्पिनिंग मिलों के लिए कच्चा माल खरीदना महंगा हो जाता है। अगर कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल पातीं, तो उनके ऑपरेटिंग मार्जिन (Operating Margin) पर सीधा असर पड़ेगा।
सरकार का कदम और ग्लोबल निर्भरता
इस संकट को कम करने के लिए सरकार ने कच्चे कपास के आयात पर ड्यूटी-फ्री विंडो को 31 दिसंबर, 2026 तक बढ़ा दिया है। हालांकि, इससे कंपनियों को राहत तो मिलेगी, लेकिन वे अब ग्लोबल मार्केट की कीमतों और करेंसी में होने वाले बदलावों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गई हैं।
रीजनल हालात
प्रोडक्शन में सबसे बड़ी गिरावट महाराष्ट्र (सेंट्रल जोन) में देखी जा रही है। वहीं, तेलंगाना और कर्नाटक (साउथ जोन) में भी स्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं, जिससे वहां की मिलों के लिए लोकल सोर्सिंग करना मुश्किल हो रहा है। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान वाले नॉर्थ जोन में स्थिति थोड़ी स्थिर जरूर है, लेकिन यह कुल नुकसान की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
इन्वेस्टर इनसाइट
आने वाले समय में यह देखना जरूरी होगा कि कंपनियां अपनी प्रोक्योरमेंट स्ट्रैटेजी को कैसे मैनेज करती हैं। जिन कंपनियों ने लंबे समय के लिए सप्लाई कॉन्ट्रैक्ट किए हैं, वे इस संकट से बेहतर तरीके से निपट सकती हैं। वहीं, छोटे खिलाड़ियों के लिए मार्जिन बनाए रखना एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
