बढ़ती महंगाई को थामने के लिए सरकार दालों के इंपोर्ट को लेकर बड़ा फैसला ले सकती है। मसूर और पीली मटर पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने पर विचार किया जा रहा है, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
महंगाई पर लगाम की कोशिश
अनियमित मानसून की मार के कारण दालों के दाम आसमान छू रहे हैं। सरकार अब सप्लाई बढ़ाने के लिए मसूर और पीली मटर पर लगने वाले इंपोर्ट टैक्स को कम करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। मकसद साफ है—त्योहारी सीजन से पहले कीमतों में स्थिरता लाना और बाजार में दालों की कमी को पूरा करना।
किसानों के हित का भी ध्यान
सरकार ने इस फैसले में एक बारीक संतुलन बनाया है। जहाँ मसूर और पीली मटर पर टैक्स कम करने की तैयारी है, वहीं चने (Chickpeas) पर इंपोर्ट ड्यूटी जस की तस बनी रहेगी। इसके पीछे बड़ी वजह घरेलू किसानों का हित है, ताकि वे बुआई के लिए प्रोत्साहित रहें और भविष्य में पैदावार प्रभावित न हो।
मार्केट पर असर
भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 में देश की कुल खपत का करीब 23% हिस्सा आयात से पूरा हुआ है। हम मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, रूस और म्यांमार से दालें मंगाते हैं।
इससे पहले सितंबर 2026 में भी सरकार ने खाने के तेलों (Palm, Soybean, Sunflower oil) पर ड्यूटी कम करके राहत दी थी। निवेशकों को अब सरकारी नोटिफिकेशन का इंतजार है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि इंपोर्ट बढ़ने से ग्लोबल कमोडिटी रेट्स और फ्रेट कॉस्ट में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, जिस पर नजर रखना जरूरी है।
