Coal Imports in India: अप्रैल 2026 में 13% गिरी खपत, घरेलू उत्पादन में उछाल

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AuthorNeha Patil|Published at:
Coal Imports in India: अप्रैल 2026 में 13% गिरी खपत, घरेलू उत्पादन में उछाल

अप्रैल 2026 में भारत का कोयला आयात **13%** घटकर **21.1 मिलियन टन** रहा। घरेलू सप्लाई बढ़ने और पावर सेक्टर द्वारा विदेशी ईंधन पर निर्भरता कम करने के चलते यह गिरावट आई है। यह दिखाता है कि कैसे Coal India Limited अपना प्रोडक्शन बढ़ाकर आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।

क्या हुआ?

अप्रैल 2026 में भारत में कोयले का आयात पिछले साल की तुलना में लगभग 13% कम हो गया। इस महीने देश ने 24.3 मिलियन टन के मुकाबले 21.1 मिलियन टन कोयला आयात किया। कोयला मंत्रालय की उन पहलों से इस ट्रेंड को बढ़ावा मिला है जो पावर सेक्टर की जरूरतों को पूरा करने के लिए आयातित ईंधन की जगह घरेलू कोयले को बढ़ावा दे रही हैं। यह आंकड़े भारत की ऊर्जा सुरक्षा के प्रबंधन में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव को दर्शाते हैं, क्योंकि घरेलू उत्पादन स्थिर हो रहा है।

पावर सेक्टर में ईंधन के उपयोग में बदलाव

आयातित कोयले की खपत में 25% की भारी गिरावट देखी गई है। अप्रैल 2026 में पावर प्लांट्स ने 4.7 MT (अप्रैल 2025) की तुलना में 3.5 MT आयातित कोयले का इस्तेमाल किया। वहीं, खास तौर पर आयातित कोयले पर चलने वाले पावर प्लांट्स ने भी 27.5% कम कोयला इस्तेमाल किया, जो 2.9 MT रहा। इससे पता चलता है कि डोमेस्टिक कोयले की सप्लाई अब ज्यादा भरोसेमंद हो गई है, जिससे महंगे अंतरराष्ट्रीय कोयले की खरीद और मिश्रण (Blending) की जरूरत कम हो गई है।

Coal India Limited का योगदान

इस सप्लाई बदलाव में Coal India Limited (CIL) मुख्य भूमिका निभा रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की पहली तिमाही में, CIL ने पावर सेक्टर को 154.8 MT कोयला सप्लाई किया, जो पिछले साल से 1.8% ज्यादा है। जून 2026 में भी यह तेजी जारी रही, जहां मंथली डिस्पैच 5.9% बढ़कर 51.4 MT तक पहुंच गया। यह वृद्धि गर्मियों के दौरान बिजली की मांग को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण है, जहां कोयला ग्रिड की रीढ़ बना हुआ है।

कैप्टिव और कमर्शियल माइनिंग में ग्रोथ

सरकारी उत्पादन के अलावा, कैप्टिव (Captive) और कमर्शियल माइनिंग सेक्टर ने भी अपना उत्पादन बढ़ाया है। जून 2026 में, इन खदानों से 17.9 MT कोयला निकला, जो जून 2025 के 15.6 MT की तुलना में 14.9% की वृद्धि है। उरतान (Urtan), धिराउली (Dhirauli) और बिक्रम (Bikram) जैसी नई खदानों के जुड़ने से सप्लाई बेस को विविधता मिल रही है। ये नई खदानें वैश्विक बाजारों पर दीर्घकालिक निर्भरता कम करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं।

निवेशकों को क्या देखना चाहिए?

पावर और माइनिंग सेक्टर पर नजर रखने वाले निवेशकों को घरेलू सप्लाई के स्तर की स्थिरता पर ध्यान देना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण यह देखना है कि क्या Coal India और प्राइवेट कैप्टिव माइनर्स बिजली की बढ़ती मांग के बीच इस उत्पादन ग्रोथ को बनाए रख पाते हैं। आयात में कमी से जहां ट्रेड बैलेंस में सुधार हो सकता है और पावर कंपनियों को फ्यूल कॉस्ट कम करने में मदद मिल सकती है, वहीं पावर उत्पादकों की लाभप्रदता (Profitability) नियंत्रित कीमतों पर लगातार घरेलू सप्लाई हासिल करने की उनकी क्षमता पर निर्भर करेगी। डोमेस्टिक एनर्जी परिदृश्य पर दीर्घकालिक प्रभाव का आकलन करने के लिए तिमाही उत्पादन अपडेट और अतिरिक्त नई खदानों के चालू होने की समय-सीमा पर नज़र रखना महत्वपूर्ण होगा।

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