भारत में बासमती चावल का उत्पादन इस साल दबाव में है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में खेती का रकबा **4%** घट गया है, जिससे ग्लोबल मार्केट में एक्सपोर्ट कीमतें **$1,160** प्रति टन तक पहुंच गई हैं।
उत्पादन में कमी की चिंता
बासमती चावल की फसल इस सीजन में सप्लाई की समस्या से जूझ रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, खेती का कुल रकबा पिछले साल के 24.9 लाख हेक्टेयर से करीब 1 लाख हेक्टेयर घट गया है। हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हुई कम बारिश के कारण बुआई में काफी कमी देखी गई है। पिछले साल देश में कुल उत्पादन लगभग 1 करोड़ टन (10 million tonnes) रहा था, लेकिन इस बार सप्लाई टाइट रहने के आसार हैं।
एक्सपोर्ट कीमतों में उछाल
सप्लाई घटने की खबरों का असर इंटरनेशनल मार्केट पर साफ दिख रहा है। भारतीय बासमती के लिए एक्सपोर्ट कोटेशन $1,160 प्रति टन पर आ गए हैं, जो पिछले साल के मुकाबले 15% से 20% ज्यादा हैं। अच्छी बात यह है कि वेस्ट एशिया जैसे बड़े बाजारों से मांग अब भी बनी हुई है। अप्रैल-जून तिमाही में 15.4 लाख टन चावल का एक्सपोर्ट हुआ है, जो डिमांड की मजबूती को दर्शाता है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
शेयर बाजार के निवेशकों को KRBL और LT Foods जैसे स्टॉक्स पर नजर रखनी चाहिए। धान की कीमतों में बढ़ोतरी (जैसे पूसा 1509 वैरायटी का करनाल में ₹3,950 प्रति क्विंटल बिकना) रेवेन्यू के लिए तो ठीक है, लेकिन कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन इस बात पर निर्भर करेगा कि वे बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर कितना डाल पाती हैं।
सरकार की पॉलिसी पर रहेगी नजर
निवेशकों को केवल फसल की पैदावार ही नहीं, बल्कि सरकार के कदमों पर भी नजर रखनी होगी। घरेलू महंगाई को देखते हुए सरकार मिनिमम एक्सपोर्ट प्राइस (MEP) या अन्य व्यापारिक नियमों में कोई बदलाव करती है, तो उसका सीधा असर इन कंपनियों के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस पर पड़ेगा। अभी मार्केट की नजर फसल की क्वालिटी और लेट-सीजन वैरायटी की सप्लाई पर टिकी है।
