गोल्ड इम्पोर्ट फिर शुरू: बैंकों ने माना 3% टैक्स का नियम, एक महीने की रोक खत्म

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
गोल्ड इम्पोर्ट फिर शुरू: बैंकों ने माना 3% टैक्स का नियम, एक महीने की रोक खत्म
Overview

भारतीय बैंकों के लिए राहत की खबर है! एक महीने से ठप्प पड़े गोल्ड और सिल्वर के आयात को फिर से शुरू कर दिया गया है। हालांकि, इस बार बैंकों को **3%** का इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) देना होगा, जिसने आयात पर लगी लंबी रोक को खत्म कर दिया है।

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नया टैक्स और आयात की बहाली

अप्रैल 2026 की पहली तारीख से गोल्ड और सिल्वर के आयात पर लगी रोक अब हट गई है। भारतीय बैंकों ने कस्टम अधिकारियों द्वारा मांगे जा रहे 3% इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (IGST) का भुगतान करने पर सहमति जताई है। पिछले लगभग एक दशक से, सरकारी आदेशों के तहत आयात करने वाले बैंकों को इस टैक्स में छूट मिलती आ रही थी, लेकिन नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत में इस छूट का नवीनीकरण नहीं हुआ। बैंकों को उम्मीद थी कि छूट बहाल हो जाएगी, लेकिन सरकार ने ट्रेड डेफिसिट और विदेशी मुद्रा भंडार को नियंत्रित करने के इरादे से गोल्ड आयात पर अंकुश लगाने के संकेत दिए। ऐसे में, सप्लाई जारी रखने के लिए बैंकों ने IGST का भुगतान करने का फैसला किया। यह कदम ऐसे समय में आया है जब इंडियन रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर हो रहा है, जो 2026 में अब तक लगभग 4.1% और 2025 में 5% गिर चुका है। सरकार का लक्ष्य सोने के आयात से होने वाले विदेशी मुद्रा के बहिर्वाह को नियंत्रित करना है।

अप्रैल में रिकॉर्ड निचले स्तर पर आयात

एक महीने की इस रोक का आयात की मात्रा पर भारी असर पड़ा है। अप्रैल 2026 में सोने का आयात घटकर मात्र 15 मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा, महामारी से प्रभावित 2020 को छोड़कर, पिछले 30 सालों में अप्रैल के लिए सबसे कम है। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब भारत में सोने की खरीदारी का एक बड़ा त्योहार, अक्षय तृतीया, करीब था। तुलना के लिए, अप्रैल 2025 में भारत ने 35 मीट्रिक टन सोना आयात किया था, जबकि पिछले फाइनेंशियल ईयर में मासिक औसत लगभग 60 मीट्रिक टन था। अप्रैल 2026 में सोने के आयात का मूल्य लगभग $1.3 बिलियन रहने की संभावना है, जो पिछले फाइनेंशियल ईयर के $6 बिलियन के मासिक औसत से काफी कम है। इस रुकावट का असर घरेलू रिफाइनरों के कच्चे माल, यानि गोल्ड डोरे पर भी पड़ा, क्योंकि नए आयात लाइसेंस के आवेदन या तो खारिज कर दिए गए या टाल दिए गए।

मांग में कमजोरी बरकरार

हालांकि आयात फिर से शुरू होने से ज्वेलरों को सप्लाई मिलने में मदद मिलेगी, लेकिन यह सरकार के नीतिगत उद्देश्यों को हल नहीं करता है। बैंक अब 3% IGST का खर्च उठा रहे हैं, जिसे अंततः ग्राहकों पर डाला जा सकता है या उनके लागत आधार को बढ़ा सकता है, जिससे भविष्य में मांग कम हो सकती है। सरकार का स्पष्ट इरादा रुपये को सहारा देने और ट्रेड डेफिसिट को कम करने के लिए सोने के आयात को कम करना है, जो आयातकों पर और अधिक दबाव या भविष्य में अन्य उपायों का संकेत देता है। भारत की रणनीति अन्य देशों की तुलना में गैर-जरूरी आयात को रोकने के लिए अधिक सीधी प्रतीत होती है। आयात फिर से शुरू होने के साथ ट्रेड डेफिसिट बढ़ने की उम्मीद है, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर और दबाव पड़ेगा। सोने की उपलब्धता में सुधार के बावजूद, घरेलू मांग कमजोर बनी हुई है। स्थानीय बाजार में सोना छूट पर बिक रहा है, जहां डीलरों द्वारा आयात और बिक्री करों को ध्यान में रखने के बाद भी आधिकारिक घरेलू दरों से $17 प्रति औंस तक कम कीमत की पेशकश की जा रही है। यह अंतर घरेलू खपत में संभावित समस्याओं या व्यापक आर्थिक भावना को दर्शाता है, जो उच्च लागत को अवशोषित करने के लिए संघर्ष कर रही है।

आगे क्या?

आयात फिर से शुरू होने और ट्रेड डेफिसिट के बढ़ने के साथ भारतीय रुपये में अस्थिरता की उम्मीद है। भारतीय बैंकों का वैश्विक बाजार में लौटना अंतरराष्ट्रीय बुलियन की कीमतों को सहारा दे सकता है, लेकिन भारत के आर्थिक मेट्रिक्स पर समग्र प्रभाव चिंता का विषय है। सरकार कथित तौर पर IGST छूट को ठीक करने के लिए काम कर रही है, जिससे यह संकेत मिलता है कि बैंकों द्वारा टैक्स के भुगतान की वर्तमान व्यवस्था अस्थायी हो सकती है। विदेशी मुद्रा भंडार और व्यापार संतुलन को प्रबंधित करने का दबाव बना रहेगा, जिससे भविष्य में नीति समायोजन या आयात मात्रा पर निगरानी हो सकती है। भारत के कीमती धातुओं के बाजार का दृष्टिकोण सतर्क बना हुआ है, जो मैक्रोइकॉनोमिक स्थिरता और व्यापार संतुलन प्रबंधन पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.