त्योहारी सीजन में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भारत ने **10 लाख टन** कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दे दी है, क्योंकि उत्पादन अनुमानों में **11%** की भारी कटौती की गई है।
भारत सरकार ने देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी को ड्यूटी-फ्री मंगाने की अनुमति दी गई है। यह कोटा 31 अक्टूबर, 2026 तक लागू रहेगा, जिसका सीधा मकसद अक्टूबर के मध्य में शुरू होने वाले नए पेराई सीजन से पहले बाजार में आपूर्ति की कमी को पूरा करना है।
उत्पादन में भारी गिरावट
चीनी के उत्पादन को लेकर आए नए आंकड़ों ने बाजार को चिंतित कर दिया है। साल 2025-26 के लिए उत्पादन का अनुमान पहले 343 लाख टन था, जिसे अब 11% घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, 'रेड रॉट' और 'टॉप बोरर' जैसी फसलों की बीमारियों और भारी बारिश के कारण खेतों में जलभराव इस कमी के मुख्य कारण हैं। इस सप्लाई क्रंच के कारण पिछले एक महीने में खुदरा चीनी की कीमतों में 15% से 20% तक का उछाल देखा गया है।
जमाखोरी पर नकेल
आयात के साथ-साथ सरकार ने सट्टेबाजी और जमाखोरी रोकने के लिए सख्त नियम भी लागू किए हैं। बल्क उपभोक्ताओं को अब 1 सितंबर, 2026 से केवल 15 दिन की खपत के बराबर स्टॉक रखने की इजाजत होगी। वहीं, ट्रेडर्स और डीलरों के लिए 400 टन की स्टॉक लिमिट तय कर दी गई है ताकि त्योहारों के दौरान बाजार में कोई कृत्रिम किल्लत न पैदा हो।
शुगर सेक्टर पर क्या होगा असर?
Balrampur Chini, Shree Renuka Sugars, EID Parry और Dalmia Bharat Sugar जैसी कंपनियों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण स्थिति है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम इस कमी के लिए जिम्मेदार नहीं है, क्योंकि अब इथेनॉल का उत्पादन मक्के जैसे अनाजों पर शिफ्ट किया जा रहा है। निवेशकों के लिए अब कंपनियों के मार्जिन और स्टॉक लिमिट नियमों का पालन करना सबसे महत्वपूर्ण मॉनिटरेबल होगा।
