India International Bullion Exchange (IIBX) पर अगस्त से अब तक **570 मीट्रिक टन** चांदी का ट्रेड हुआ है। DGFT के नए लाइसेंसिंग नियमों ने बैंकों की मोनोपॉली को कम किया है और एक्सचेंज का सालाना लक्ष्य **2,000 टन** तक पहुंचने का है।
अगस्त के बाद से इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) पर चांदी के वॉल्यूम में जोरदार उछाल देखा गया है। मई में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (DGFT) द्वारा चांदी की कुछ कैटेगरी को 'रिस्ट्रिक्टेड लिस्ट' में डालने के फैसले का सीधा फायदा एक्सचेंज को मिला है। नए नियमों के चलते अब इम्पोर्टर्स को सरकारी लाइसेंस लेना अनिवार्य है, जिससे चांदी के आयात पर बैंकों का एकाधिकार काफी हद तक कम हो गया है।
बैंकों की मोनोपॉली टूटी
पुराने सिस्टम में चांदी का आयात मुख्य रूप से नॉमिनेटेड बैंक ही करते थे, जो अक्सर चुनिंदा बड़े क्लाइंट्स को ही प्राथमिकता देते थे। इस वजह से छोटे ज्वैलर्स और स्वतंत्र बुलियन इम्पोर्टर्स को डिमांड के समय ऊंची कीमतों पर मेटल खरीदना पड़ता था। अब IIBX के जरिए छोटे प्लेयर्स भी सीधे मार्केट से मेटल खरीद सकते हैं, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और इम्पोर्टर्स अब एक्सचेंज का रुख कर रहे हैं।
IIBX के लिए सिल्वर बनी 'ग्रोथ इंजन'
शुरुआत में IIBX का पूरा फोकस गोल्ड ट्रेडिंग पर था, लेकिन 2025 की शुरुआत में कस्टम ड्यूटी कोटा को लेकर हुए कानूनी विवाद ने गोल्ड वॉल्यूम को झटका दिया। ऐसे में एक्सचेंज ने चांदी को अपना मुख्य हथियार बनाया है। मैनेजमेंट ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में 2,000 टन से अधिक चांदी के ट्रेड का लक्ष्य रखा है।
भविष्य की राह और चुनौतियां
एक्सचेंज की सफलता अब पूरी तरह से DGFT की लाइसेंस पॉलिसी पर निर्भर करती है। यदि भविष्य में आयात नियमों में बदलाव होता है, तो वॉल्यूम पर असर पड़ सकता है। मार्केट एक्सपर्ट्स अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या सरकार सभी लाइसेंस प्राप्त आयात का एक हिस्सा अनिवार्य रूप से एक्सचेंज के जरिए कराने का आदेश देगी, जिससे यह तेजी स्थाई हो सकेगी।
