अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) वित्त मंत्रालय से GIFT City में कमोडिटी ट्रेडिंग को आधिकारिक मान्यता देने के लिए मंजूरी मांग रहा है। इस कदम से कच्चे तेल और सोने जैसे उत्पादों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, हेजिंग और फाइनेंसिंग संभव हो सकेगा, और भारत अपना व्यापारिक कारोबार सिंगापुर और दुबई जैसे वैश्विक हब से वापस ला पाएगा।
GIFT City में होगा अब अंतर्राष्ट्रीय कमोडिटी का खेल!
गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी (GIFT City) वैश्विक कमोडिटी ट्रेडिंग बाज़ार में अपनी पैठ बनाने की तैयारी में है। अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (IFSCA) ने वित्त मंत्रालय को एक प्रस्ताव भेजा है, जिसमें कमोडिटी ट्रेडिंग को एक 'वित्तीय गतिविधि' के तौर पर कानूनी दर्जा देने की मांग की गई है। वर्तमान में, रेगुलेटरी गैप के चलते कच्चे तेल, धातुओं और कृषि वस्तुओं के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, प्राइस हेजिंग (कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचाव) और ट्रेड फाइनेंसिंग जैसी सेवाएं GIFT City में पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हैं। इस प्रस्ताव का मकसद इस कमी को दूर करना है।
भारत लाएगा अपना ट्रेडिंग कारोबार!
IFSCA के चेयरपर्सन, के. राजारमन ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत दुनिया की कई प्रमुख कमोडिटीज का बड़ा उपभोक्ता और आयातक होने के बावजूद, इसका अधिकांश ट्रेडिंग कारोबार सिंगापुर, दुबई और स्विट्जरलैंड जैसे अंतर्राष्ट्रीय हब से होता है। एक औपचारिक ढांचा तैयार करके, GIFT City की मंशा है कि भारतीय फर्मों को अपना ट्रेडिंग ऑपरेशन्स भारत से ही संचालित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। यह रणनीति बुलियन (सोना-चांदी) मार्केट में अपनाए गए सफल मॉडल की तरह है, जहां कानूनी मान्यता मिलने के बाद 2022 में इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) लॉन्च किया गया था। IIBX आज स्पॉट और फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट्स दोनों में काम करता है, और यही मॉडल अब अन्य कमोडिटीज के लिए भी लागू करने की योजना है।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है, तो GIFT City में स्थित कंपनियाँ क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजैक्शंस जैसे मर्चेंटिंग और री-इनवॉइसिंग को आसानी से कर पाएंगी। इसका मतलब है कि कंपनियाँ एक देश से कमोडिटी खरीदकर दूसरे देश को बेच सकेंगी, भले ही वह सामान भारत में फिजिकली न आए। इन कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म और स्ट्रक्चर्ड ट्रेड फाइनेंसिंग की सुविधा भी मिलेगी। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि IFSCA की भूमिका इन वित्तीय और ट्रेडिंग सेवाओं तक सीमित रहेगी। माल की वेयरहाउसिंग, स्टोरेज और मूवमेंट जैसे फिजिकल पहलू पहले की तरह ही फ्री ट्रेड वेयरहाउसिंग ज़ोन (FTWZ) और स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (SEZ) के नियमों के तहत संचालित होंगे।
आगे क्या?
निवेशकों और बाज़ार प्रतिभागियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि वित्त मंत्रालय इस प्रस्ताव पर कब फैसला लेता है और रेगुलेटर (IFSCA) कब तक इसके परिचालन दिशानिर्देश जारी करता है। यदि सब कुछ ठीक रहा, तो कमोडिटीज के लिए एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार होने से सेंटर में नए ट्रेडिंग प्रतिभागी आकर्षित हो सकते हैं और वित्तीय लेन-देन की मात्रा बढ़ सकती है। निवेशकों को इस बात पर नज़र रखनी चाहिए कि यह रेगुलेटरी ढांचा कितनी जल्दी स्थापित होता है और क्या यह अंतर्राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धियों से ट्रेडिंग वॉल्यूम खींचने में सफल हो पाता है - जो कि इस फाइनेंशियल हब का एक बड़ा दीर्घकालिक लक्ष्य है।
