IFSCA ने GIFT City स्थित इंडिया इंटरनेशनल बुलियन एक्सचेंज (IIBX) पर सोने की ट्रेडिंग के लिए नए 'Good Delivery Guidelines 2026' जारी किए हैं। इन नियमों का लक्ष्य ट्रांसपेरेंसी और एथिकल सोर्सिंग को बढ़ावा देना है, जिससे गोल्ड मार्केट ग्लोबल लेवल पर और अधिक विश्वसनीय बनेगा।
इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (IFSCA) ने गोल्ड ट्रेडिंग में एक बड़ा बदलाव करते हुए 'Good Delivery Guidelines 2026' का ऐलान किया है। अब IIBX पर सोने के कारोबार के लिए केवल शुद्धता और वजन की जांच ही काफी नहीं होगी, बल्कि कंपनियों को एनवायर्नमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ESG) मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।\n\n### सोर्सिंग का प्रूफ देना अनिवार्य\nनए नियमों के तहत, रिफाइनर्स और ट्रेडर्स को इस बात का प्रमाण देना होगा कि सोना कहां से आया है। इसमें माइंड डोर, पुरानी ज्वैलरी और स्क्रैप—सभी शामिल हैं। इसका मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एक्सचेंज पर आने वाला सोना किसी भी तरह के 'कॉन्फ्लिक्ट-फाइनेंसिंग' से मुक्त हो। अथॉरिटी का लक्ष्य भारतीय बुलियन मार्केट को लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) और OECD जैसे ग्लोबल बेंचमार्क्स के बराबर लाना है।\n\n### मार्केट पर क्या होगा असर?\nयह कदम भारतीय गोल्ड मार्केट को एक बड़ी पहचान दिला सकता है। ग्लोबल रिफाइनर्स और बड़े इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स, जो अब तक मानकों के अभाव में दूर थे, वे अब IIBX की ओर आकर्षित हो सकते हैं। इससे मार्केट में बेहतर प्राइस डिस्कवरी की उम्मीद है।\n\n### रिफाइनर्स के लिए चुनौती\nहालांकि, छोटे रिफाइनर्स के लिए यह राह आसान नहीं होगी। नई गाइडलाइंस के मुताबिक, कंपनियों को अपने इंटरनल गवर्नेंस सिस्टम को मजबूत करना होगा और लगातार ऑडिट कराने होंगे। इस 'कंप्लायंस कॉस्ट' से कई छोटे प्लेयर्स के मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। जो रिफाइनर्स इन मानकों को पूरा नहीं कर पाएंगे, उन्हें एक्सचेंज से बाहर का रास्ता देखना पड़ सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय रिफाइनिंग इंडस्ट्री इन ग्लोबल स्टैंडर्ड्स को कितनी तेजी से अपनाती है और इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम पर क्या असर पड़ता है।
