International Energy Agency: कच्चे तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए IEA जारी करेगा **10 करोड़** बैरल, भारत पर क्या होगा असर?

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
International Energy Agency: कच्चे तेल की कीमतों को काबू में करने के लिए IEA जारी करेगा **10 करोड़** बैरल, भारत पर क्या होगा असर?

ग्लोबल सप्लाई को संतुलित करने के लिए इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने **10 करोड़** बैरल तेल जारी करने का फैसला किया है। हालांकि, वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड अभी भी **$100** प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जो भारतीय निवेशकों के लिए चिंता का विषय है।

IEA का बड़ा कदम

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) ने ग्लोबल मार्केट में तेल की कमी को दूर करने के लिए अपने इमरजेंसी स्टॉक से 10 करोड़ बैरल तेल निकालने की तैयारी पूरी कर ली है। इस प्लान में 2 करोड़ बैरल डीजल भी शामिल है। गौर करने वाली बात यह है कि इस प्रोग्राम की शुरुआत से अब तक कुल 33 करोड़ बैरल तेल बाजार में उतारा जा चुका है, ताकि कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव को रोका जा सके।

क्यों नहीं गिर रही क्रूड की कीमत?

इतनी सप्लाई के बावजूद ब्रेंट क्रूड $100 के स्तर से नीचे आने में संघर्ष कर रहा है। इसके पीछे मुख्य वजह वेस्ट एशिया में जारी तनाव और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) के रास्ते सप्लाई में अनिश्चितता है। ट्रेडर्स को डर है कि अगर डिप्लोमैटिक लेवल पर कोई समाधान नहीं निकला, तो सप्लाई रिस्क बना रहेगा।

अमेरिका का डेटा और सप्लाई की कमी

यूनाइटेड स्टेट्स एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि स्थिति कितनी नाजुक है। 8 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में अमेरिकी क्रूड स्टॉक 86 लाख बैरल गिरकर 41.56 करोड़ बैरल पर पहुंच गया, जो 5 साल के एवरेज से 3% कम है। डिस्टिलेट की सप्लाई तो 5 साल के एवरेज से 12% नीचे चल रही है, जिससे साफ है कि डिमांड, सप्लाई से कहीं ज्यादा है।

भारतीय निवेशकों के लिए क्या है मायने?

भारत अपनी कुल जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड के ऊंचे दाम न केवल रुपये पर दबाव डालते हैं, बल्कि देश में महंगाई को भी हवा देते हैं।

  • OMCs पर दबाव: Indian Oil Corporation, BPCL और HPCL जैसी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के मार्जिन पर इसका सीधा असर पड़ता है, खासकर तब जब रिटेल फ्यूल प्राइसेज को क्रूड की तेजी के हिसाब से बार-बार नहीं बढ़ाया जाता।
  • रिफाइनर्स का गणित: दूसरी तरफ, Reliance Industries जैसी कंपनियों का प्रदर्शन 'क्रैक स्प्रेड्स' (कच्चे तेल और रिफाइंड प्रोडक्ट्स की कीमतों का अंतर) पर निर्भर करता है।

आने वाले हफ्तों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या IEA की यह कोशिश तेल की कीमतों को ठंडा कर पाती है या वेस्ट एशिया का तनाव बाजार को और डराएगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.