ICICI Prudential Silver ETF: 3 साल में **42.7%** का शानदार रिटर्न, कैटेगरी में टॉप पर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
ICICI Prudential Silver ETF: 3 साल में **42.7%** का शानदार रिटर्न, कैटेगरी में टॉप पर

ICICI Prudential Silver ETF ने पिछले 3 सालों में **42.7%** का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) दर्ज कर अपने सेक्टर में टॉप परफॉर्मर का खिताब हासिल किया है। हालांकि, लंबी अवधि के शानदार रिटर्न के बावजूद, निवेशकों को छोटी अवधि में हाई वोलेटिलिटी (Volatility) और बड़े ड्राडाउन (Drawdowns) का ध्यान रखना चाहिए।

Detailed Coverage

3 साल में 42.7% CAGR, बना कैटेगरी का किंग

ACE MF के आंकड़ों के अनुसार, ICICI Prudential Silver ETF ने 21 जुलाई 2026 तक पिछले तीन सालों में 42.7% का कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) हासिल किया है। यह प्रदर्शन इतना दमदार है कि फंड अपने बेंचमार्क को पीछे छोड़ने में कामयाब रहा, जिसने इसी अवधि में 0% का रिटर्न दिया। एक साल के रिटर्न में भी यह आउटपरफॉर्मेंस जारी रहा, जहां फंड ने 94.6% का रिटर्न दिया, जबकि बेंचमार्क सपाट रहा।

कॉम्पीटिशन और फंड का साइज़

अगर हम दूसरे बड़े प्लेयर्स की बात करें, तो Kotak Silver ETF और Nippon India Silver ETF भी पीछे नहीं रहे। Kotak Silver ETF ने तीन साल में 42.6% और Nippon India Silver ETF ने 42.3% का CAGR दर्ज किया। लेकिन जब बात फंड के साइज़ और लिक्विडिटी (Liquidity) की आती है, तो Nippon India Silver ETF सबसे आगे है। इसका एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹30,011.6 करोड़ है, जो ₹1,500 करोड़ से अधिक AUM वाले फंड्स में सबसे बड़ा है।

सिल्वर ETF की वोलेटिलिटी को समझना

लंबे समय के रिटर्न भले ही आकर्षक लगें, लेकिन सिल्वर एक कमोडिटी (Commodity) होने के नाते स्वाभाविक रूप से वोलेटाइल (Volatile) है। छोटी अवधि में इसका प्रदर्शन काफी अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, पिछले छह महीनों में, टॉप सिल्वर ETF में -28.8% से -29.0% तक के ड्राडाउन देखे गए। हाल के आंकड़ों के मुताबिक, Axis Silver ETF जैसे फंड्स ने एक महीने और तीन महीने की अवधि में नेगेटिव रिटर्न -3.5% और -10.7% के बावजूद टॉप परफॉर्मेंस दी है।

यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि सिल्वर ETF सीधे फिजिकल सिल्वर की कीमत को ट्रैक करते हैं। इसका मतलब है कि इनका प्रदर्शन ग्लोबल कमोडिटी मार्केट से सीधे जुड़ा होता है, जो इंडस्ट्रियल डिमांड, मॉनेटरी पॉलिसी और करेंसी के उतार-चढ़ाव से प्रभावित होता है। छोटी अवधि के नुकसान और लंबी अवधि के फायदों के बीच का यह बड़ा अंतर दर्शाता है कि प्रदर्शन चुने गए टाइमफ्रेम के आधार पर तेजी से बदल सकता है।

निवेशकों को केवल ऐतिहासिक CAGR पर ही ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि फंड के एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio), ट्रैकिंग एरर (Tracking Error) - जो मापता है कि ETF सिल्वर की वास्तविक कीमत को कितनी बारीकी से फॉलो करता है - और फंड की ओवरऑल लिक्विडिटी पर भी नजर रखनी चाहिए। क्योंकि कमोडिटी की कीमतें सीधी रेखा में नहीं चलतीं, बड़े ड्राडाउन की संभावना को समझना पिछले रिटर्न की समीक्षा करने जितना ही महत्वपूर्ण है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.