ICICI Pru Silver ETF: 1 साल में 100% से ज़्यादा रिटर्न, पर चांदी की कीमत गिरी!

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AuthorMehul Desai|Published at:
ICICI Pru Silver ETF: 1 साल में 100% से ज़्यादा रिटर्न, पर चांदी की कीमत गिरी!

ICICI Prudential Silver ETF ने पिछले एक साल में **100%** से ज़्यादा का शानदार रिटर्न दिया है। लेकिन, **18 अगस्त** को चांदी की कीमत **1%** से ज़्यादा गिर गई, जो इस एसेट क्लास की वोलेटिलिटी (Volatility) को दिखाता है। निवेशकों को ध्यान देना चाहिए कि कमोडिटी ETF में रिस्क ज़्यादा होता है।

ICICI Prudential Silver ETF का कमाल!

ICICI Prudential Silver ETF भारतीय सिल्वर एक्सचेंज-Traded Funds (ETFs) में सबसे आगे रहा है। अगस्त 2026 के मध्य तक, इस फंड ने पिछले एक साल में 100% से ज़्यादा का रिटर्न दिया है। यह रिटर्न पिछले बारह महीनों में फिजिकल सिल्वर की कीमतों में आए ज़बरदस्त उछाल का नतीजा है। अगस्त 2026 तक, फंड का एसेट बेस करीब ₹13,700 करोड़ था और इसका एक्सपेंस रेशियो लगभग 0.40% रहा है।

वोलेटिलिटी का झटका

हालांकि, एक साल का रिटर्न चार्ट बहुत अच्छा दिख रहा है, लेकिन 18 अगस्त 2026 को डोमेस्टिक सिल्वर की कीमतों में 1% से ज़्यादा की गिरावट देखी गई। यह घटना निवेशकों को याद दिलाती है कि कमोडिटी-लिंक्ड ETF सीधे ऊपर नहीं जाते और ग्लोबल इकोनॉमिक फैक्टर्स के कारण इनमें अचानक गिरावट आ सकती है।

हाई-रिस्क वाला निवेश

इक्विटी फंड्स के उलट, जिनका वैल्यू कॉर्पोरेट कमाई और ग्रोथ से आता है, सिल्वर ETF फिजिकल सिल्वर की डोमेस्टिक कीमत को ट्रैक करने वाले पैसिव इंस्ट्रूमेंट हैं। यह इन्हें एक हाई-रिस्क वाला निवेश बनाता है। इंडस्ट्रियल डिमांड में बदलाव, जियोपॉलिटिकल टेंशन और ग्लोबल सेंट्रल बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी जैसे फैक्टर्स सिल्वर की कीमतों में बड़े उतार-चढ़ाव ला सकते हैं। निवेशकों को यह समझना चाहिए कि कमोडिटी में पिछला परफॉरमेंस भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है, और अगर अंडरलाइंग मेटल की कीमत गिरती है तो इन ETF की वैल्यू तेज़ी से घट सकती है।

बाकी फंड्स से तुलना

जब इन फंड्स का मूल्यांकन किया जाता है, तो परफॉरमेंस रैंकिंग टाइम हॉराइजोन के हिसाब से काफी अलग हो सकती है। जहां ICICI Prudential Silver ETF ने एक साल के मेट्रिक्स में लीड किया है, वहीं Aditya Birla SL Silver ETF और Kotak Silver ETF जैसे फंड्स भी इस स्पेस में एक्टिव कॉम्पिटीटर हैं। चूंकि ये फंड पैसिव हैं, इसलिए निवेशकों के लिए एक ज़रूरी मॉनिटरेबल 'ट्रैकिंग एरर' है, जो ETF के रिटर्न और सिल्वर की एक्चुअल प्राइस मूवमेंट के बीच का अंतर होता है। ज़्यादा ट्रैकिंग एरर का मतलब है कि निवेशक को फिजिकल एसेट के परफॉरमेंस की तुलना में कम रिटर्न मिल सकता है।

किसे करना चाहिए निवेश?

जो निवेशक इस कैटेगरी पर विचार कर रहे हैं, उन्हें अपनी रिस्क टॉलरेंस को प्राथमिकता देनी चाहिए। ये फंड्स आमतौर पर उन लोगों के लिए सही हैं जो कमोडिटी साइकिल्स को समझते हैं और लॉन्ग-टर्म व्यू रखते हैं, न कि लगातार, कम-वोलेटिलिटी वाले रिटर्न चाहने वालों के लिए। आगे, मार्केट पार्टिसिपेंट्स ग्लोबल सिल्वर प्राइस ट्रेंड्स और हाई मार्केट वोलेटिलिटी के दौरान ट्रैकिंग डिफरेंस को कम करने में फंड की क्षमता पर नज़र रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.