ICICI Bank की एक हालिया रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि ग्लोबल मार्केट में सोने की कीमत 2027 की पहली छमाही तक **$5,000** प्रति औंस के स्तर को छू सकती है। अमेरिकी राजकोषीय चिंताओं और सेंट्रल बैंकों की खरीदारी को इसकी मुख्य वजह बताया गया है।
ICICI Bank का मानना है कि भले ही सोना अभी थोड़े कंसोलिडेशन फेज में हो, लेकिन लॉन्ग टर्म की तस्वीर बुलिश बनी हुई है। बैंक के मुताबिक, 2026 के बाकी दिनों में सोना $4,200 से $4,600 के दायरे में रह सकता है। यह तेजी मुख्य रूप से डॉलर के कमजोर होने और अमेरिकी रियल इंटरेस्ट रेट्स में गिरावट की उम्मीद पर टिकी है।
तेजी को रफ्तार देने वाले फैक्टर
सोने को सबसे बड़ा सपोर्ट ग्लोबल सेंट्रल बैंकों, खासकर People's Bank of China की खरीदारी से मिल रहा है, जो डॉलर पर अपनी निर्भरता कम कर रहे हैं। वहीं, अमेरिका का बढ़ता राजकोषीय घाटा भी निवेशकों को सोने की सुरक्षित पनाहगाह की ओर खींच रहा है। हालांकि, यह सफर उतार-चढ़ाव से भरा हो सकता है। सितंबर 2026 में अमेरिका में ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रहने की आशंका के चलते सोने में 8% की गिरावट देखी गई थी, जो यह साबित करता है कि महंगाई और ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए बड़ी चुनौती हैं।
भारतीय निवेशकों के लिए क्या है मायने?
घरेलू बाजार में सोने की कीमतें ग्लोबल संकेतों और रुपये की चाल पर निर्भर करती हैं। ICICI Bank का अनुमान है कि 2026 के अंत तक भारत में सोने के दाम ₹1.40 लाख से ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच रह सकते हैं। इस रिकॉर्ड स्तर की कीमतों के कारण ज्वेलरी की मांग तो कम हुई है, लेकिन गोल्ड ETF जैसे फाइनेंशियल प्रोडक्ट्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
रिस्क फैक्टर पर रखें नजर
निवेशकों को याद रखना चाहिए कि अगर अमेरिका में महंगाई के आंकड़े कम नहीं हुए, तो Federal Reserve ब्याज दरों को ऊंचा रख सकता है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव बना रहेगा। फिलहाल निवेशकों को अमेरिकी महंगाई की रिपोर्ट्स और Fed की पॉलिसी स्टेटमेंट पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
