सप्लाई चेन पर खतरा
संयुक्त राष्ट्र की खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, होरमुज़ जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ता तनाव वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। इससे अगले 6 से 12 महीनों में दुनिया भर में खाद्य कीमतों का संकट खड़ा हो सकता है।
एफएओ के खाद्य मूल्य सूचकांक (FAO Food Price Index) में अप्रैल तक लगातार तीन महीने से बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसका मुख्य कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और मध्य पूर्व में चल रहे संघर्षों का व्यापार पर असर है। होरमुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक उर्वरक व्यापार का लगभग 30% हिस्सा संभालता है। अगर यहां व्यवधान आता है, खासकर कतर से होने वाले प्राकृतिक गैस निर्यात पर, जो नाइट्रोजन उर्वरक के लिए महत्वपूर्ण है, तो उर्वरकों की उपलब्धता कम हो सकती है। इससे फसलों की पैदावार पर असर पड़ेगा और खाद्य कीमतें आसमान छू सकती हैं।
अल नीनो और मौसम की चिंता
साथ ही, मई से जुलाई के बीच 'सुपर अल नीनो' के विकसित होने की 82% संभावना है। यह मौसम के पैटर्न को बदल सकता है, बारिश कम कर सकता है और दुनिया भर में प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ा सकता है। भारत, जो एक प्रमुख कृषि उत्पादक देश है, को भी सामान्य से कम मानसून का सामना करना पड़ सकता है, जिससे फसलों पर असर पड़ सकता है। हालांकि भारत के पास खाद्य भंडार है, लेकिन एफएओ का कहना है कि दुनिया को बचाने के लिए प्रमुख खाद्य उत्पादक देशों द्वारा निर्यात पर प्रतिबंध से बचना महत्वपूर्ण है।
सेक्टर के जोखिम और लचीलापन
होरमुज़ का संकट वैश्विक कमोडिटी सेक्टर में मौजूद गंभीर जोखिमों को उजागर करता है। जिन कंपनियों की सप्लाई चेन विविध है और जो इन महत्वपूर्ण मार्गों पर निर्भर नहीं हैं, वे बेहतर स्थिति में रह सकती हैं। लेकिन ऊर्जा, उर्वरक और खाद्य बाजारों की आपसी निर्भरता को देखते हुए, अप्रत्यक्ष प्रभाव भी कंपनियों के मुनाफे पर दबाव डाल सकता है। ऐसे में इस सेक्टर में सप्लाई चेन को मजबूत करने और वैकल्पिक लॉजिस्टिक्स पर निवेश बढ़ने की उम्मीद है।
तनाव बढ़ने की संभावना
होरमुज़ जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण रास्तों पर भारी निर्भरता एक बड़ा भू-राजनीतिक और लॉजिस्टिक जोखिम है। संभावित 'सुपर अल नीनो' मौसमी अनिश्चितता को और बढ़ा रहा है, जिसका विकासशील देशों पर अधिक प्रभाव पड़ सकता है। अगर प्रमुख खाद्य उत्पादक देश घरेलू कमी के कारण निर्यात पर प्रतिबंध लगाते हैं, तो यह एक खतरनाक चक्र बना सकता है, जिससे वैश्विक कीमतें तेजी से बढ़ेंगी और मानवीय चिंताएं बढ़ेंगी।
