Hindustan Zinc Share Price: ₹50,000 Cr की बड़ी योजना पर सरकारी बिकवाली का खतरा! 6% टूटा शेयर

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AuthorMehul Desai|Published at:
Hindustan Zinc Share Price: ₹50,000 Cr की बड़ी योजना पर सरकारी बिकवाली का खतरा! 6% टूटा शेयर
Overview

Hindustan Zinc ने अगले पांच सालों में **₹50,000 करोड़** के निवेश से अपनी मेटल क्षमता दोगुनी करने की बड़ी योजना का ऐलान किया है। लेकिन, सरकार द्वारा अपनी हिस्सेदारी बेचने की अटकलों के चलते शेयर में **6%** की भारी गिरावट आई है।

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कंपनी की विशाल योजनाएं और बाजार का डर

कंपनी का मैनेजमेंट अगले पांच सालों में ₹50,000 करोड़ का भारी-भरकम कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) करने की योजना बना रहा है। इस पैसे से रिफाइंड मेटल की उत्पादन क्षमता को दोगुना करके 20 लाख टन तक ले जाने का लक्ष्य है। लेकिन, शेयर बाजार में इसका उल्टा असर हुआ और इसमें भारी बिकवाली देखने को मिली। 5 जून 2026 को शेयर ₹569 के निचले स्तर तक चला गया था। निवेशक कंपनी की लंबी अवधि की ग्रोथ को सरकारी हिस्सेदारी की बिक्री की नज़दीकी चिंता के साथ तौल रहे हैं। यह आशंका है कि सरकार 2% हिस्सेदारी बेच सकती है, जिससे बाजार में लगभग ₹5,000 करोड़ के शेयर आ सकते हैं। पिछली बार जब सरकार ने हिस्सेदारी बेची थी, तब भी ऐसा ही दबाव देखने को मिला था।

फंडामेंटल्स क्या कहते हैं?

तकनीकी और फंडामेंटल के लिहाज़ से, Hindustan Zinc भारत के जिंक मार्केट में 75% की हिस्सेदारी के साथ एक बड़ी कंपनी है। मार्च 2026 तिमाही में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 56.84% रहा, जो कि मजबूत प्रदर्शन को दर्शाता है। वोलेटाइल मेटल सेक्टर की दूसरी कंपनियों के मुकाबले, Hindustan Zinc के पास कम लागत वाले इंटीग्रेटेड ऑपरेशन्स हैं और यह दुनिया के टॉप सिल्वर उत्पादकों में से एक है। हालांकि, हाल ही में प्रोडक्शन सीक्वेंस में बदलाव के कारण सिल्वर का उत्पादन कुछ कम हुआ है, जिससे ग्लोबल रैंकिंग में थोड़ी गिरावट आई है। कंपनी 5 करोड़ टन से ज़्यादा रिजर्व बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जिससे 25 साल तक का प्रोडक्शन लाइफ मिल जाएगा। पर फिलहाल, बाजार इस पर ज़्यादा ध्यान दे रहा है कि बड़े निवेशकों (Institutional Investors) की हिस्सेदारी का क्या होगा।

बिकवाली का मुख्य कारण

सरकार की विनिवेश (Disinvestment) रणनीति और शेयर की लिक्विडिटी के बीच का तालमेल इस समय सबसे बड़ा जोखिम है। सरकार के पास कंपनी में लगभग 29.5% हिस्सेदारी है। ऐसे में, जब भी 2% हिस्सेदारी बेचने की खबर आती है, तो शेयर की कीमत में गिरावट की उम्मीद दिखने लगती है और यह ऑफर फॉर सेल (OFS) की आशंका में नीचे चला जाता है। इसके अलावा, हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate) की कंपनी ऑफिस में हुई विजिट ने भी निवेशकों की अनिश्चितता बढ़ा दी है। यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि कंपनी की बैलेंस शीट मजबूत है, लेकिन भारी-भरकम कैपेक्स साइकल के लिए लगातार फ्री कैश फ्लो की ज़रूरत होती है। अगर कमोडिटी की कीमतों में गिरावट आती है या इनपुट कॉस्ट बढ़ती है, तो यह प्रभावित हो सकता है।

भविष्य का नज़रिया

फिलहाल शेयर में उथल-पुथल के बावजूद, एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी भारत के एनर्जी ट्रांजिशन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ज़्यादातर ब्रोकरेज फर्मों ने शेयर के लिए ₹630–₹829 का टारगेट प्राइस दिया है। उनका मानना है कि विस्तार योजना से लंबी अवधि में वैल्यू बनेगी, जब सप्लाई का दबाव कम हो जाएगा। जून 2026 से नए CFO अमित गुप्ता की नियुक्ति वित्तीय प्रबंधन और गवर्नेंस पर कंपनी के फोकस को दर्शाती है, जो इस कैपिटल-इंटेंसिव विस्तार साइकल में स्थिरता ला सकती है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.