Hindustan Zinc ने माइनिंग वेस्ट को कमाई का जरिया बनाने की तैयारी कर ली है। कंपनी **10 मिलियन टन प्रति वर्ष** (MTPA) क्षमता वाला टेलिंग्स रिसाइकलिंग प्लांट लगा रही है। साथ ही, कंपनी ने अपने प्रोडक्शन कॉस्ट गाइडेंस को घटाकर **$825-$850** प्रति टन कर दिया है।
कचरे से खनिज निकालने की नई तकनीक
Hindustan Zinc अब 'वेस्ट टू वेल्थ' मॉडल पर काम कर रही है। कंपनी एक ऐसी रिसाइकलिंग फैसिलिटी बना रही है, जो माइनिंग के दौरान निकले वेस्ट (Tailings) से जिंक और जर्मेनियम जैसे कीमती मिनरल्स को दोबारा रिकवर करेगी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद पुरानी खदानों के कचरे को भी मुनाफे में बदलना है।
कॉस्ट एफिशिएंसी पर जोर
CEO अमरेंद्र प्रकाश के नेतृत्व में कंपनी ने फाइनेंशियल ईयर के लिए अपनी कॉस्ट ऑफ प्रोडक्शन (COP) गाइडेंस को बेहतर किया है। इसे पहले के $1,000 प्रति टन के अनुमान से घटाकर $825-$850 प्रति टन कर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब माइनिंग साइट्स पर ओर ग्रेड (Ore Grade) में गिरावट देखी जा रही है, जो मार्जिन बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।
सिल्वर और कैपेसिटी एक्सपेंशन
कंपनी का फोकस केवल जिंक तक सीमित नहीं है। सिल्वर (चांदी) के लिए कंपनी ने 680 टन का सालाना प्रोडक्शन टारगेट रखा है, जिसमें से वित्त वर्ष की पहली छमाही में ही 320 टन से ज्यादा का प्रोडक्शन हो चुका है। कंपनी अगले 2 से 5 सालों में अपनी कुल माइनिंग थ्रूपुट को 18 MTPA से बढ़ाकर 35 MTPA करने के बड़े लक्ष्य पर काम कर रही है।
निवेशकों के लिए क्या है अहम?
ग्लोबल मार्केट में जिंक की सप्लाई में 180,000 टन की कमी का अनुमान है, जो कंपनी के लिए मददगार साबित हो सकता है। हालांकि, निवेशकों को इस बात पर नजर रखनी चाहिए कि कंपनी अपने विस्तार के दौरान बढ़ते खर्चों और कच्चे माल की घटती क्वालिटी जैसी चुनौतियों को कैसे मैनेज करती है।
