Hindustan Zinc के निवेशकों के लिए अच्छी खबर है! कंपनी ने जून तिमाही में अपना मुनाफा पिछले साल की तुलना में दोगुना से ज़्यादा कर ₹5,469 करोड़ दर्ज किया है। यह शानदार नतीजों की वजह हाई मेटल प्राइस, रिकॉर्ड प्रोडक्शन और ऑपरेशनल एफिशिएंसी रही।
Detailed Coverage
रिकॉर्ड उत्पादन और मेटल की कीमतों ने दिखाई कमाल
भारत की दिग्गज जिंक और सिल्वर उत्पादक कंपनी Hindustan Zinc ने नए फाइनेंशियल ईयर की शुरुआत दमदार की है। कंपनी ने जून तिमाही के लिए ₹5,469 करोड़ का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट घोषित किया है, जो पिछले साल की इसी अवधि में ₹2,234 करोड़ था। यह आंकड़ा बाज़ार की उम्मीदों से कहीं बेहतर है। कंपनी को इसका फायदा ऊंची मेटल कीमतों और कमजोर पड़ती भारतीय रुपये से मिला है, जो एक्सपोर्टर्स के लिए अक्सर फायदेमंद साबित होता है।
ऑपरेशनल एफिशिएंसी और प्रोडक्शन के नए कीर्तिमान
इस तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू (Revenue) भी रिकॉर्ड स्तर पर ₹13,747 करोड़ रहा, जो पिछले साल की तुलना में 77% ज़्यादा है। इस ग्रोथ का श्रेय कंपनी के रिकॉर्ड माइनड मेटल प्रोडक्शन को जाता है, जो पहली तिमाही में 2,68,000 टन तक पहुंचा। कंपनी के मुताबिक, यह लगातार पांचवां साल है जब उन्होंने जून तिमाही में प्रोडक्शन का रिकॉर्ड बनाया है। प्रोडक्शन बढ़ने के साथ-साथ जिंक बनाने की लागत भी घटकर $851 प्रति टन (रॉयल्टी छोड़कर) आ गई है, जो अंडरग्राउंड माइनिंग में आने के बाद सबसे कम है।
EBITDA, यानी ऑपरेटिंग प्रॉफिट, भी ₹8,074 करोड़ के ऑल-टाइम हाई पर पहुँच गया, जिसमें मार्जिन 59% तक बढ़ गया। सिल्वर, जो कंपनी के प्रोडक्ट मिक्स का एक बड़ा हिस्सा है, ने कुल प्रॉफिटेबिलिटी में करीब 46% का योगदान दिया। कंपनी के पास ₹5,572 करोड़ की नेट कैश पोजीशन है, जिससे वह प्रति शेयर ₹11 का इंटरिम डिविडेंड (Interim Dividend) दे सकती है और साथ ही अपने कैपिटल स्पेंडिंग प्लान्स को भी जारी रख सकती है।
मैनेजमेंट में बड़े बदलाव की तैयारी
आंकड़ों के अलावा, कंपनी मैनेजमेंट में बड़े बदलाव के लिए भी तैयार है। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAIL) के पूर्व प्रमुख अमरेन्दु प्रकाश 1 अगस्त से Hindustan Zinc के CEO का पद संभालेंगे। वह अरुण मिश्रा की जगह लेंगे, जो Vedanta Group में एक लीडिंग रोल में जा रहे हैं। इसके अलावा, अमित गुप्ता 1 जून से चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) का चार्ज संभाल चुके हैं।
आगे की रणनीति और ज़रूरी बातें
कंपनी ने सालाना 1.1 मिलियन टन माइनड मेटल के प्रोडक्शन का अनुमान बरकरार रखा है। इन्वेस्टर्स कंपनी की लॉन्ग-टर्म कैपिटल प्रोजेक्ट्स, जिसमें एक नया इंटीग्रेटेड जिंक स्मेल्टर और फॉस्फोरिक एसिड प्लांट शामिल है, की प्रगति पर नज़र रखेंगे। एक बड़े जिंक और लेड स्मेल्टर का प्रस्ताव अभी बोर्ड की मंजूरी का इंतज़ार कर रहा है। जहां कंपनी को अभी ग्लोबल मेटल प्राइस का फायदा मिल रहा है, वहीं भविष्य का प्रॉफिट इन कीमतों की स्थिरता और अपने एक्सपेंशन प्लान्स के साथ प्रोडक्शन एफिशिएंसी बनाए रखने की क्षमता पर निर्भर करेगा।
