मुनाफे में आई रिकॉर्ड उछाल, शेयर क्यों गिरा?
Hindustan Copper Limited के शेयरधारकों के लिए आज का दिन मिला-जुला रहा। एक तरफ जहां कंपनी ने चौथी तिमाही (Q4 FY26) में शानदार फाइनेंशियल रिजल्ट्स पेश किए, वहीं दूसरी तरफ शेयर की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई। कंपनी ने ₹444.06 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 134% ज्यादा है। वहीं, रेवेन्यू भी 58% बढ़कर ₹1,156.08 करोड़ तक पहुंच गया। पूरे फाइनेंशियल ईयर (FY26) की बात करें तो नेट प्रॉफिट 97% बढ़कर ₹920.66 करोड़ पर पहुंच गया, जबकि रेवेन्यू में 49% की ग्रोथ दर्ज हुई। इन बेहतरीन नतीजों के बावजूद, शेयर 5.97% लुढ़ककर ₹570.25 पर बंद हुआ, और इसमें भारी ट्रेडिंग वॉल्यूम देखने को मिला।
वैल्यूएशन और QIP का डर
इस गिरावट की मुख्य वजह निवेशकों की चिंताएं हैं, खासकर कंपनी की वैल्यूएशन (Valuation) और आने वाली फंड जुटाने की योजना (QIP)। Hindustan Copper का प्राइस-टू-अर्निंग्स (P/E) रेशियो 84-90 के बीच है, जो कि इसके प्रतिद्वंद्वियों Vedanta (P/E 6.3x-18.66x), Hindalco Industries (P/E 15.0-15.42x) और Nalco (P/E लगभग 11.84-12.90x) से काफी ज्यादा है। इतनी ऊंची वैल्यूएशन यह दर्शाती है कि बाजार भविष्य में भारी ग्रोथ की उम्मीद कर रहा है।
इसके अलावा, कंपनी की बोर्ड की ओर से Qualified Institutional Placement (QIP) के जरिए फंड जुटाने की योजना निवेशकों को डरा रही है। कंपनी शेयरधारकों से 9.69 करोड़ इक्विटी शेयर जारी करने की मंजूरी मांग रही है। इस पैसे का इस्तेमाल कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capital Expenditure) और कंपनी के विस्तार (Expansion) के लिए किया जाएगा, जिसका लक्ष्य 2030-31 तक माइनिंग कैपेसिटी को 12 MT तक बढ़ाना है। लेकिन, QIP से मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी कम होने (Dilution) का खतरा है, जिसने नतीजों की चमक फीकी कर दी।
गवर्नेंस और कमोडिटी आउटलुक
बाजार की इस प्रतिक्रिया में कॉरपोरेट गवर्नेंस (Corporate Governance) से जुड़ी चिंताओं ने भी भूमिका निभाई। ऑडिटर ने इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स (Independent Directors) और महिला डायरेक्टर (Woman Director) की अनुपस्थिति पर भी टिप्पणी की, जिससे ऑडिट कमेटी के कामकाज पर असर पड़ा। हालांकि, इससे ऑडिट ओपिनियन (Audit Opinion) पर कोई फर्क नहीं पड़ा, लेकिन यह बड़े निवेशकों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
हालांकि, लंबी अवधि के लिए कमोडिटी (Commodity) मार्केट का आउटलुक (Outlook) सकारात्मक दिख रहा है। इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) इंफ्रास्ट्रक्चर, AI और रिन्यूएबल एनर्जी की बढ़ती मांग के कारण कॉपर की कीमतें 2026 तक ऊंची रहने की उम्मीद है। सरकार की पहलों से माइनिंग सेक्टर में ग्रोथ की संभावना है।
एनालिस्ट्स का नजरिया
विश्लेषकों (Analysts) का नजरिया आम तौर पर सकारात्मक है, और उनका मानना है कि स्टॉक में 22% तक का अपसाइड (Upside) देखने को मिल सकता है, जिसका टारगेट प्राइस लगभग ₹663 है। कंपनी की विस्तार योजनाएं और अनुकूल कॉपर प्राइस फोरकास्ट (Copper Price Forecast) लंबी अवधि में फायदेमंद साबित हो सकती हैं। पर, निकट भविष्य में QIP के निष्पादन (Execution) और वैल्यूएशन पर असर पड़ेगा, जो स्टॉक की दिशा तय करेगा।