Hindustan Copper के शेयरों में आज **7%** की जबरदस्त उछाल आई, शेयर **₹568** के स्तर पर पहुंच गया। इसकी वजह है ग्लोबल कॉपर की कीमतों में आई तेज़ी, जो रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। कंपनी के हालिया Q1 FY27 नतीजों ने भी निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है, जिसमें नेट प्रॉफिट **162%** बढ़ा है। हालांकि, निवेशक कमोडिटी की कीमतों में उतार-चढ़ाव और कंपनी के पुराने गवर्नेंस मसलों को लेकर भी सतर्क हैं।
ग्लोबल डिमांड से मिली रॉकेट स्पीड!
17 अगस्त 2026 को Hindustan Copper के शेयर ने इंट्राडे में 7% की छलांग लगाते हुए ₹568 का स्तर छू लिया। इस ज़ोरदार तेज़ी की मुख्य वजह लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर कॉपर की कीमतों में आई भारी तेज़ी है। सप्लाई की कमी के चलते कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं।
LME मार्केट में इस समय अजीब स्थिति बनी हुई है, जहाँ तुरंत डिलीवरी वाले कॉपर की कीमत भविष्य के कॉन्ट्रैक्ट से ज़्यादा है। यह इशारा करता है कि बाज़ार में कॉपर की तत्काल मांग, उपलब्ध स्टॉक से कहीं ज़्यादा है। फरवरी के बाद LME का स्टॉक सबसे निचले स्तर पर आ गया है, जिससे तीन महीने के कॉपर फ्यूचर्स की कीमत बढ़ गई है, जिसका सीधा फायदा Hindustan Copper जैसे उत्पादकों को हो रहा है।
नतीजों ने भी लगाया बूस्टर!
शेयर की इस तेज़ी में कंपनी के हालिया नतीजों का भी बड़ा योगदान है। 30 जून 2026 को खत्म हुई तिमाही में Hindustan Copper ने ₹352 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 162% ज़्यादा है। वहीं, रेवेन्यू में 81% की बढ़त के साथ यह ₹936 करोड़ पर पहुंच गया। बढ़ी हुई कॉपर की कीमतों ने कंपनी के EBITDA मार्जिन को 54.2% तक पहुंचा दिया है।
विस्तार की बड़ी योजना!
इस ज़ोरदार डिमांड का फायदा उठाने के लिए कंपनी ने अगले पांच सालों में लगभग ₹7,189 करोड़ के निवेश की योजना बनाई है। इस पैसे से कंपनी अपनी माइनिंग और प्रोसेसिंग क्षमता को बढ़ाने पर काम करेगी। भारत की एकमात्र वर्टिकली इंटीग्रेटेड कॉपर उत्पादक कंपनी होने के नाते, यह निवेश देश की आयात पर निर्भरता कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।
रिस्क फैक्टर को न भूलें!
हालांकि, कॉपर की बढ़ती कीमतों से कंपनी की ग्रोथ की उम्मीदें जगी हैं, लेकिन निवेशकों को कमोडिटी से जुड़े शेयरों में मौजूद रिस्क को भी समझना चाहिए। Hindustan Copper का प्रदर्शन LME की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील है। अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कोई भी बड़ी गिरावट कंपनी के मुनाफे पर असर डाल सकती है।
इसके अलावा, कंपनी अतीत में रेगुलेटरी मुश्किलों से भी गुज़र चुकी है। SEBI के नियमों के उल्लंघन, खासकर इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स की नियुक्ति को लेकर, कंपनी पर जुर्माना भी लगा था। ऐसे गवर्नेंस मुद्दे सरकारी कंपनियों में बोर्ड सदस्यों के नॉमिनेशन की जटिलताओं से जुड़े रहे हैं। निवेशकों के लिए भविष्य में कंपनी के विस्तार प्रोजेक्ट की रफ़्तार और ग्लोबल कॉपर की कीमतों की स्थिरता पर नज़र रखना ज़रूरी होगा।
