HSBC ने साल 2026 और 2027 के लिए सोने की कीमतों के अपने अनुमानों में कटौती की है। इसका मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बदली हुई उम्मीदें हैं। हालांकि, ब्रोकरेज का सोने के प्रति लॉन्ग-टर्म व्यू अभी भी पॉजिटिव बना हुआ है।
सोने की कीमतों पर क्यों गिरी गाज?
HSBC ने सोने की कीमतों के अनुमानों को कम करते हुए कहा है कि मजबूत अमेरिकी डॉलर और फेडरल रिजर्व के ब्याज दरों को लेकर बदली हुई उम्मीदें कीमती धातु पर दबाव बना रही हैं। ब्रोकरेज ने 2026 के लिए सोने का औसत अनुमान घटाकर $4,560 प्रति औंस कर दिया है, जो पहले $4,864 था। वहीं, 2027 के लिए अनुमान को $4,925 प्रति औंस किया गया है, जबकि पहले यह $5,000 था। 2028 और 2029 के लिए अनुमानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, क्योंकि ब्रोकरेज का मानना है कि कीमतों में यह गिरावट एक बड़े ट्रेंड के भीतर एक अस्थायी हलचल है।
भारतीय सोने की मांग पर असर?
भारतीय बाजार में, फिजिकल खपत दोहरी चुनौती का सामना कर रही है। एक तरफ, घरेलू कीमतों का ऊंचा होना और इंपोर्ट ड्यूटी का बढ़ना पारंपरिक ज्वेलरी की मांग को प्रभावित कर रहा है। वहीं, दूसरी तरफ, लोग फाइनेंशियल एसेट्स की ओर बढ़ रहे हैं। गोल्ड-लिंक्ड फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स में संस्थागत निवेशकों की रुचि बढ़ी है, जो हाल के रेगुलेटरी बदलावों से भी समर्थित है। हालांकि, 2026 की पहली तिमाही में भारत और चीन में कंज्यूमर ज्वेलरी की मांग में बड़ी गिरावट देखी गई थी, और HSBC को उम्मीद है कि यह धीमी ज्वेलरी खपत का ट्रेंड इस साल बाकी समय में भी जारी रहेगा और 2027 तक स्थिर होगा।
मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स और अस्थिरता
मार्केट का फोकस अब भू-राजनीतिक घटनाओं से हटकर मैक्रो इकोनॉमिक फैक्टर्स जैसे रियल इंटरेस्ट रेट्स और अमेरिकी करेंसी की मजबूती पर आ गया है। HSBC को उम्मीद है कि 2026 के बाकी समय में सोना $3,800 से $4,700 प्रति औंस के बीच अस्थिर रह सकता है। ब्रोकरेज का मानना है कि फेडरल रिजर्व की आक्रामक नीति की उम्मीदों का असर पहले ही मौजूदा कीमतों में शामिल हो चुका है, जिससे आगे और बड़ी गिरावट की गुंजाइश कम हो सकती है।
लॉन्ग-टर्म सपोर्ट के कारण
मौद्रिक नीति और मजबूत डॉलर के मौजूदा दबाव के बावजूद, सोने के पक्ष में लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल आर्गुमेंट्स अभी भी मजबूत हैं। ब्रोकरेज का कहना है कि बढ़ता फिस्कल डेफिसिट और ग्लोबल सॉवरेन डेट (सरकारी कर्ज) का बढ़ना सोने की मांग के महत्वपूर्ण ड्राइवर बन रहे हैं। 2029 तक ग्लोबल पब्लिक डेट के जीडीपी के 100% तक पहुंचने की उम्मीद के साथ, सोने को पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन के लिए एक सुरक्षित संपत्ति के रूप में देखा जा रहा है। इसके अलावा, 2025 में रिकॉर्ड कीमतों के कारण सेंट्रल बैंकों की सोने की खरीद थोड़ी धीमी हुई थी, लेकिन HSBC को उम्मीद है कि वे इस साल बाद में अपनी खरीद बढ़ाएंगे। निवेशक सेंट्रल बैंकों की खरीद गतिविधि और गोल्ड-बैक्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की चाल पर नजर रख सकते हैं, ताकि यह समझा जा सके कि संस्थागत मांग ज्वेलरी खपत की कमजोरी की भरपाई कर पाती है या नहीं।
