शहरी भारत पर पड़ी मार
मध्य पूर्व में चल रहे युद्ध का असर अब भारत के शहरों पर भी साफ दिख रहा है, खासकर निम्न आय वर्ग के लोगों पर। जो लोग पहले सस्ते एलपीजी (LPG) पर निर्भर थे, अब मुश्किल में हैं। दिल्ली के कश्मीरी गेट स्टेशन के पास एक फूड स्टॉल चलाने वाले सत्यपाल ने बताया कि उन्हें अब केरोसिन पर स्विच करना पड़ा है। केरोसिन का इस्तेमाल करने में उनके स्टोव को चलाने का खर्चा लगभग 10 गुना तक बढ़ गया है। इसके बावजूद, ग्राहकों की कमी के चलते उनकी रोज की कमाई आधी रह गई है और एक साधारण खाने की कीमत में 25% की बढ़ोतरी हुई है।
परिवार और बिजनेस के सामने खड़े बड़े सवाल
आम घरों में भी एलपीजी (LPG) सिलेंडर की कीमतें सब्सिडी रेट से 4 गुना तक बढ़ गई हैं, जिससे आठ सदस्यों वाले सत्यपाल के परिवार को भारी दिक्कत हो रही है। अब वे लकड़ी के चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं। रेस्टोरेंट और कैटरर्स भी इससे अछूते नहीं हैं। मेनू छोटा किया जा रहा है, तले हुए पकवान कम परोसे जा रहे हैं और वनस्पति तेल का इस्तेमाल भी घटा दिया गया है। राजू भंडारी, जो एक छोटे रेस्टोरेंट के मालिक हैं, उन्होंने भी एलपीजी (LPG) से कोयले और लकड़ी पर शिफ्ट किया है। उनका कहना है कि अब सफाई का काम भी मुश्किल हो गया है। इन बढ़ी हुई लागतों का असर सीधे ग्राहकों पर पड़ रहा है, खासकर धरम पाल जैसे दिहाड़ी मजदूरों पर, जिनकी आमदनी पहले से ही बढ़ी हुई खाने की कीमतों से प्रभावित है।
सरकारी कदम और भू-राजनीतिक अनिश्चितता
इन हालातों को देखते हुए सरकार ने इमरजेंसी पावर का इस्तेमाल करते हुए घरेलू एलपीजी (LPG) प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन का विस्तार तेजी से किया जा रहा है, जिससे हर दिन 10,000 नए ग्राहक जुड़ रहे हैं। सरकार ने एलपीजी (LPG) की जमाखोरी और ब्लैक मार्केट पर नकेल कसने के लिए 3,000 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी भी की है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आश्वासन दिया है कि डोमेस्टिक प्रोडक्शन बढ़ाने से स्थिति सामान्य हो रही है और कमर्शियल सप्लाई फिर से शुरू होगी। हालांकि, भारत के तेल मंत्रालय में एक ज्वाइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने यह भी माना है कि चल रही युद्ध की स्थिति के कारण तत्काल राहत उपायों में कुछ मुश्किलें आ रही हैं।