Solvent Extractors’ Association की रिपोर्ट के अनुसार, खरीफ सीजन 2026-27 के लिए गुजरात में मूंगफली का उत्पादन **20.5%** गिरकर **33.30 लाख टन** रहने का अनुमान है। सौराष्ट्र क्षेत्र में कम बारिश के चलते कच्चे माल की किल्लत पैदा हो सकती है, जिसका सीधा असर एडिबल ऑयल कंपनियों के मार्जिन पर पड़ने की आशंका है।
उत्पादन में बड़ी गिरावट के कारण
Solvent Extractors’ Association (SEA) ने हाल ही में अपने फील्ड सर्वे में खुलासा किया है कि खराब मौसम की वजह से गुजरात में खरीफ सीजन की पैदावार पर बुरा असर पड़ा है। पिछले सीजन में उत्पादन 41.88 लाख टन था, जो अब घटकर 33.30 लाख टन रहने की उम्मीद है। बेमौसम और असमान बारिश ने राज्य के कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान पहुँचाया है।
सौराष्ट्र क्षेत्र का बुरा हाल
मूंगफली के उत्पादन का गढ़ माने जाने वाले सौराष्ट्र क्षेत्र में स्थिति चिंताजनक है। यहाँ कुल उत्पादन में 19.8% की गिरावट के साथ यह 25.53 लाख टन तक सीमित रह सकता है। हालाँकि जूनागढ़ और अमरेली जैसे जिलों में स्थिति कुछ हद तक संभली हुई है, लेकिन राजकोट और जामनगर जैसे बड़े उत्पादक जिलों में भारी कमी देखी गई है। राजकोट में उत्पादन 6.60 लाख टन से गिरकर 5.90 लाख टन और जामनगर में 5.63 लाख टन से फिसलकर 3.26 लाख टन रहने का अनुमान है।
कंपनियों के मार्जिन पर क्या होगा असर?
इस साल प्रति हेक्टेयर उपज भी घटकर 1,608 किलो रह गई है, जो पिछले साल 1,902 किलो थी। कच्चे माल की कमी से एडिबल ऑयल कंपनियों के लिए प्रोक्योरमेंट कॉस्ट (खरीद लागत) बढ़ना तय है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या ये कंपनियां बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डाल पाएंगी या फिर उन्हें अपने प्रॉफिट मार्जिन से समझौता करना पड़ेगा। आने वाली तिमाही नतीजों में मैनेजमेंट की कमेंट्री, इन्वेंट्री लेवल और कच्चे माल की सोर्सिंग पर चर्चा करना महत्वपूर्ण होगा।
