Graphite India के लिए अमेरिका से बुरी खबर आई है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग (U.S. Department of Commerce) ने कंपनी के बड़े व्यास वाले ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड के निर्यात पर **3.68%** की प्रारंभिक प्रतिपूरक शुल्क (countervailing duty) लगा दी है। कंपनी का कहना है कि इसका वित्तीय प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब कंपनी वैश्विक मांग में गिरावट और हाल ही में जर्मनी में अपने घाटे वाले मैन्युफैक्चरिंग डिवीजनों को बंद करने की प्रक्रिया से गुजर रही है।
Detailed Coverage
अमेरिका का व्यापारिक फैसला
Graphite India Ltd. को अमेरिकी वाणिज्य विभाग से एक प्रारंभिक सकारात्मक निर्धारण (preliminary affirmative determination) की सूचना मिली है। इस जांच के तहत, कंपनी के संयुक्त राज्य अमेरिका को निर्यात किए जाने वाले बड़े व्यास वाले ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड पर 3.68% का शुल्क लगाया जाएगा। कंपनी ने निवेशकों को सूचित किया है कि अमेरिकी प्राधिकरण ने व्यापार प्रथाओं के किसी विशिष्ट उल्लंघन का आरोप नहीं लगाया है, लेकिन इस शुल्क का कुल वित्तीय प्रभाव अभी तक नहीं आंका जा सकता है।
जर्मनी डिवीजनों का बंद होना
यह व्यापारिक झटका कंपनी के लिए बड़े परिचालन परिवर्तनों के बीच आया है। इसी महीने, Graphite India ने जर्मनी में अपने Graphite Specialities और Coating डिवीजनों को बंद करने की घोषणा की थी। कंपनी ने रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बढ़ते आर्थिक दबाव और गिरती मांग को इन इकाइयों की प्रतिस्पर्धात्मकता में कमी का कारण बताया है। यह प्रक्रिया स्थानीय वर्क्स काउंसिल (Works Council) के साथ सलाह-मशविरे के बाद अगले छह महीनों में पूरी होने की उम्मीद है। वित्तीय वर्ष 2026 (मार्च में समाप्त) के आंकड़ों के अनुसार, इन जर्मन इकाइयों ने कंपनी के कुल राजस्व में लगभग ₹105.29 करोड़ का योगदान दिया था, जो कंपनी के टर्नओवर का लगभग 4% था। यह ध्यान देने योग्य है कि 31 मार्च, 2026 तक इन डिवीजनों का नेट वर्थ -₹322.53 करोड़ था।
वित्तीय दबाव और बाजार की स्थिति
कंपनी वर्तमान में एक चुनौतीपूर्ण वित्तीय माहौल से जूझ रही है। वित्तीय वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में, Graphite India ने ₹16 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछले साल की समान अवधि के ₹29 करोड़ की तुलना में कम है। ऑपरेटिंग प्रदर्शन पर भी दबाव देखा गया, कंपनी ने पिछले साल की इसी तिमाही में ₹62 करोड़ के EBITDA प्रॉफिट की तुलना में -₹10 करोड़ का ऑपरेटिंग लॉस दर्ज किया। तिमाही राजस्व में साल-दर-साल 12% की गिरावट आई, जो ₹720 करोड़ रहा। इन मुश्किलों के बावजूद, कंपनी ने ₹11 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया, जो जून 2019 के बाद उनका सबसे बड़ा भुगतान है। इस खबर के चलते BSE पर Graphite India के शेयर ₹648.10 पर बंद हुए, जो 2.26% की गिरावट दर्शाता है।
निवेशकों को यह देखना होगा कि कंपनी नई अमेरिकी ड्यूटी से निपटने के लिए अपनी निर्यात रणनीति को कैसे समायोजित करती है। आने वाले महीनों में मुख्य ध्यान जर्मन संयंत्रों के बंद होने के सफल निष्पादन पर रहेगा और क्या कंपनी ग्रेफाइट उत्पादों की वैश्विक मांग में नरमी के बीच अपने लाभ मार्जिन को स्थिर कर पाती है। निर्यात मूल्य निर्धारण पर प्रबंधन की टिप्पणी और अमेरिकी ड्यूटी का अंतिम निर्धारण महत्वपूर्ण अपडेट होंगे जिन पर नजर रखी जानी चाहिए।
