बढ़ती महंगाई पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अपना बफर स्टॉक खोल दिया है। **17 शहरों** में **₹35 प्रति किलो** की दर से प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है ताकि आम आदमी को राहत मिल सके और महंगाई कंट्रोल में रहे।
महंगाई को काबू में करने के लिए केंद्र सरकार ने युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया है। सरकार ने अपने बफर स्टॉक से 4,000 टन प्याज को मार्केट में रिलीज कर दिया है। इस पूरी मुहिम को NCCF और Nafed जैसी सरकारी एजेंसियां मैनेज कर रही हैं। दिल्ली, मुंबई और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में, जहां प्याज के दाम आसमान छू रहे थे, वहां अब इसे ₹35 प्रति किलो के सब्सिडी वाले रेट पर बेचा जा रहा है।
महंगाई और मार्केट सेंटीमेंट पर असर
इन्वेस्टर्स के लिए यह खबर सिर्फ एक कमोडिटी अपडेट नहीं है, बल्कि इसका सीधा कनेक्शन CPI (Consumer Price Index) से है। खाद्य महंगाई RBI के लिए ब्याज दरों (Interest Rates) पर फैसला लेने का एक बड़ा आधार होती है। अगर सब्जियों के दाम लगातार बढ़ते हैं, तो यह महंगाई के आंकड़ों को बिगाड़ सकता है। सरकार ने साल 2026 के लिए 1.21 लाख टन का बफर स्टॉक तैयार रखा है, ताकि महंगाई को एक दायरे में रखा जा सके। एक स्थिर महंगाई दर बैंकिंग और लेंडिंग सेक्टर के लिए हमेशा पॉजिटिव संकेत होती है।
'कांदा एक्सप्रेस' का कमाल
सप्लाई चेन में आने वाली दिक्कतों को दूर करने के लिए सरकार ने विशेष लॉजिस्टिक्स का सहारा लिया है। 'कांदा एक्सप्रेस' (Kanda Express) नाम की डेडिकेटेड रेल सर्विस शुरू की गई है, जिससे प्याज को पैदावार वाले इलाकों से सीधे डिमांड वाले हब तक तेजी से पहुंचाया जा रहा है। इससे ट्रांसपोर्टेशन में होने वाली देरी और बर्बादी कम हुई है।
क्या अभी भी है कोई रिस्क?
भले ही शुरुआती नतीजे राहत दे रहे हैं, लेकिन मार्केट अभी भी काफी सेंसिटिव है। मौसम की मार, जैसे अचानक हुई बारिश, फसलों की क्वालिटी खराब कर सकती है। इसके अलावा, बफर स्टॉक सीमित है। त्यौहारों और शादियों के सीजन में डिमांड बढ़ती है, ऐसे में अक्टूबर के मध्य तक, जब तक खरीफ की नई फसल बाजार में नहीं आ जाती, तब तक सप्लाई चेन पर बारीक नजर रखना जरूरी होगा।
